रोहतक 2 सितंबर। शहर में लगातार गहराते पेयजल संकट के स्थायी समाधान को लेकर विधायक भारत भूषण बत्रा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर उन्हें पूरा रूट मैप सौंपा और समस्या से अवगत करवाया हैं । बत्रा ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था, नहरों से पानी मिलने के अंतराल और स्टोरेज क्षमता की कमी को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि रोहतक को हर साल नहरबंदी के दौरान पानी की किल्लत और गंदले पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। इसका अस्थायी नहीं, स्थायी समाधान जरूरी है। मुख्यमंत्री ने उन्हें पूरे मामले में उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है।

बत्रा ने विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री को पत्र सौंपते हुए उन्हें बताया कि रोहतक शहर में तीन वाटर वर्क्स हैं। इन्हें जवाहरलाल नेहरू नहर से 16 दिन और भालौट सब ब्रांच से 8 दिन पानी मिलता है। इसके बाद करीब 16 दिन तक शहर को किसी नहर से पानी नहीं मिलता। विभाग के मुताबिक तीनों वाटर वर्क्स के स्टोरेज टैंक अधिकतम करीब 7 दिन की जरूरत पूरी कर पाते हैं। ऐसे में शेष अवधि में पानी की राशनिंग करनी पड़ती है।
बत्रा ने कहा कि जब पाइपलाइन पूरी तरह भरी नहीं रहती और घरों में मोटर लगातार चलती हैं तो गंदला पानी पाइपों में प्रवेश कर जाता है और लोगों के घरों तक पहुंचने लगता है। बत्रा ने कहा कि स्वच्छ पेयजल किसी भी नागरिक की बुनियादी जरूरत है और इसका स्थायी इंतजाम सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए।

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चौथा वाटर वर्क्स बनने तक रिजर्वायर बने, दो जगह जमीन भी चिन्हित
बत्रा ने मुख्यमंत्री को सौंपे रूट मैप में कहा कि चौथे वाटर वर्क्स की जरूरत है, लेकिन उसके निर्माण में समय लगेगा। इसलिए नहर से पानी की 16 दिन की सप्लाई गैप अवधि के लिए तत्काल दो बड़े वाटर रिजर्वायर बनाए जाने चाहिए।
इसके लिए तिलियार झील पर 15.6 एकड़ जमीन पर जलाशय बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए हरियाणा पर्यटन विभाग से जमीन मांगी गई है और जमीन के हस्तांतरण के लिए जिला उपायुक्त की ओर से सरकार को डिमांड भेजी जा चुकी है। इसी तरह गढ़ी बोहर में वाटर वर्क्स के साथ खाली पड़ी 15.9 एकड़ जमीन को भी जलाशय के लिए चिन्हित किया गया है।
बत्रा ने मुख्यमंत्री से इन दोनों प्रस्तावों पर जल्द कार्रवाई की मांग की, ताकि नहरबंदी के दौरान शहर को पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जा सके।

8 गांवों की पेयजल व्यवस्था का भी भार कम होगा
विधायक ने यह भी बताया कि रोहतक शहर से लगते आठ गांवों को भी इन्हीं तीन वाटर वर्क्स से पानी की आपूर्ति होती है। इन गांवों के लिए Water Augmentation Scheme के तहत नए वाटर वर्क्स के निर्माण के लिए ₹214 करोड़ के विकास कार्यों की तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि मामला वित्तीय स्वीकृति के लिए लंबित है। बत्रा ने मुख्यमंत्री से इस प्रस्ताव को वित्तीय मंजूरी देने का आग्रह किया। उनका कहना है कि नए वाटर वर्क्स बनने से आठ गांवों की अलग व्यवस्था होगी और मौजूदा तीन वाटर वर्क्स पर दबाव कम होगा। इससे रोहतक शहर की जलापूर्ति को भी राहत मिलेगी।


‘सुनो नहरों की पुकार’ मिशन का ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को सौंपा,विभिन्न धार्मिक सामग्री और गणेश प्रतिमाओं के नहरों में विसर्जित करने पर रोक की मांग, धार्मिक सामग्री के निपटान के लिए सरकार बनाए स्पष्ट गाइडलाइंस
पेयजल संकट के साथ विधायक भारत भूषण बत्रा ने ‘सुनो नहरों की पुकार मिशन, रोहतक’ की ओर से दिए गए ज्ञापन को भी मुख्यमंत्री को सौंपा। ज्ञापन में गणेश महोत्सव के दौरान भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं और अन्य धार्मिक सामग्री को नहरों में प्रवाहित किए जाने से रोकने तथा विसर्जन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की गई है।
मिशन की ओर से दिए गए पत्र में डॉक्टर जसमेर सिंह एवं अन्य द्वारा कहा गया है कि प्रदेश में पेयजल का सबसे बड़ा स्रोत नहरें हैं। इनमें धार्मिक सामग्री, प्लास्टिक के थैले और अन्य वस्तुएं डालने से नहरों का पानी प्रदूषित होता है। इससे केवल पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती, बल्कि जलीय जीव-जंतुओं और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि रोहतक से गुजरने वाली नहरों का पानी रोहतक के साथ झज्जर, रेवाड़ी, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ तक पेयजल के रूप में इस्तेमाल होता है।

बत्रा ने कहा कि धार्मिक आस्था का पूरा सम्मान होना चाहिए, लेकिन इसके साथ नहरों और पेयजल स्रोतों की स्वच्छता से समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार को धार्मिक सामग्री के विसर्जन और निपटान के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनानी चाहिए और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि आस्था भी बनी रहे और पेयजल स्रोत भी दूषित न हों।


बत्रा के समाधान का रूट मैप

  • नहरबंदी के 16 दिन के अंतराल के लिए दो बड़े जलाशय बनाए जाएं।
  • तिलियर झील की 15.6 एकड़ जमीन पर जलाशय का प्रस्ताव।
  • गढ़ी बोहर में 15.9 एकड़ जमीन जलाशय के लिए चिन्हित।
  • आठ गांवों के लिए 214 करोड़ रुपए के नए वाटर वर्क्स को वित्तीय स्वीकृति मिले।
  • नहरों में धार्मिक सामग्री प्रवाहित करने पर रोक के लिए स्पष्ट सरकारी गाइडलाइंस बनें।
  • गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित हो।
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