इन दिनों प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह से वे पिछले कुछ दिनों से रात्रि पदयात्रा पर नहीं निकल पा रहे हैं और न ही भक्तों को दर्शन दे पा रहे हैं। बुधवार को जब वे रोज़ की तरह यात्रा पर नहीं आए, तो भक्तों को चिंता हुई। अगले दिन भी उनके दर्शन न होने से कई भक्त भावुक होकर रो पड़े। गुरुवार सुबह जब भक्तों की भीड़ आश्रम के बाहर एकत्र हुई, तो महाराज जी कुछ समय के लिए गाड़ी से उतरे और थोड़ी दूर पैदल चलकर भक्तों का अभिवादन किया।
प्रेमानंद महाराज लगभग 18 साल से एक गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे हैं। उन्हें ऑटोसोमल डॉमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (ADPKD) नाम की बीमारी है। यह एक अनुवांशिक (जेनेटिक) बीमारी होती है, जिसमें किडनी में धीरे-धीरे सिस्ट यानी गांठें बनने लगती हैं। इन गांठों की वजह से किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है और समय के साथ किडनी पूरी तरह खराब हो सकती है। इसी कारण अब महाराज जी को डायलिसिस पर रखा गया है, क्योंकि उनकी दोनों किडनियां अब सही से काम नहीं कर पा रही हैं।
प्रेमानंद महाराज लगभग 18 साल से एक गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे हैं। उन्हें ऑटोसोमल डॉमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (ADPKD) नाम की बीमारी है। यह एक अनुवांशिक (जेनेटिक) बीमारी होती है, जिसमें किडनी में धीरे-धीरे सिस्ट यानी गांठें बनने लगती हैं। इन गांठों की वजह से किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है और समय के साथ किडनी पूरी तरह खराब हो सकती है। इसी कारण अब महाराज जी को डायलिसिस पर रखा गया है, क्योंकि उनकी दोनों किडनियां अब सही से काम नहीं कर पा रही हैं।
ADPKD एक जेनेटिक रोग है, जो अक्सर परिवार के माध्यम से अगली पीढ़ी तक पहुंचता है। अगर माता या पिता में से किसी एक को यह बीमारी है, तो उनके बच्चों को इसके होने की 50 प्रतिशत संभावना रहती है। इस बीमारी का कारण जीन्स में गड़बड़ी होता है। इसके अलावा, खराब जीवनशैली, असंतुलित खान-पान, धूम्रपान, शराब का सेवन और कम पानी पीना जैसी आदतें भी इस बीमारी को बढ़ावा देती हैं।
इस बीमारी के कारण शरीर में कई परेशानियां शुरू हो जाती हैं। जैसे—पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द बना रहना, पेशाब करने में दिक्कत होना, हाथ-पैरों में सूजन आना, थकावट महसूस होना और डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं होना। कुछ मामलों में खून की कमी (एनीमिया) भी देखी जाती है
