केंद्र ने कई राज्यों से बुधवार 7 मई को सुरक्षा मॉक ड्रिल करने को कहा है. 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच सरकार का यह निर्देश काफी अहम है. केंद्र के आदेश का समय महत्वपूर्ण है.पिछली बार ऐसी ड्रिल 1971 में आयोजित की गई थी, जिस साल भारत और पाकिस्तान के बीच दो मोर्चों पर युद्ध हुआ था.

भारत ने 7 मई को जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा समेत सभी राज्यों में युद्ध सुरक्षा मॉक ड्रिल का आदेश दिया है. इस दौरान हवाई हमले की चेतावनी और नागरिक सुरक्षा शामिल है. आदेश है कि ऑल 244 कैटेगराइज्ड सिविल डिफेंस टाउन और डिस्ट्रिक्ट में इसे किया जाएगा.

एयर स्ट्राइक की चेतावनी देने वाले सायरन चालू करने के लिए भी कहा गया है. चुने गए क्षेत्रों में क्रैश ब्लैकआउक उपाय अपनाए जाने के लिए कहा गया है. इस दौरान हवाई या जमीनी हमले की स्थिति में सभी छात्रों और नागरिकों को ट्रेंड करने की बात कही गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की, इस बात की अटकलों के बीच कि नई दिल्ली हमले का क्या जवाब देगी. बैठक आधे घंटे से अधिक समय तक चली. यह बैठक प्रधानमंत्री द्वारा एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह से मुलाकात के एक दिन बाद हुई है. प्रधानमंत्री अब तक थलसेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों से मिल चुके हैं.

पाकिस्तान ने लगातार 11 रातों से नियंत्रण रेखा पर भारतीय चौकियों पर गोलीबारी की है. भारत ने इस्लामाबाद की ओर से बार-बार सीमा पार से की जा रही गोलीबारी का कड़ा जवाब दिया है. पंजाब के फिरोजपुर में कल रात 9 से 9:30 बजे तक छावनी क्षेत्र में लाइटें बंद कर दी गईं. अधिकारी ने पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (PSPCL) से अभ्यास के निर्धारित समय पर बिजली काटने को कहा.

छावनी बोर्ड के अधिकारी ने एक पत्र में कहा, “आपसे अनुरोध है कि इस अवधि के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें, क्योंकि पूरी तरह से ब्लैकआउट है.” अधिकारी ने कहा, “इस रिहर्सल का उद्देश्य मौजूदा युद्ध खतरों के दौरान ब्लैकआउट प्रक्रियाओं को लागू करने में तैयारी और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है.”

गृह मंत्रालय के अनुसार मॉक ड्रिल का उद्देश्य क्या है?

1. हवाई हमले की चेतावनी देने वाली प्रणालियों की प्रभावशीलता का आकलन करना.
2. भारतीय वायुसेना के साथ हॉटलाइन/रेडियो संचार लिंक का संचालन करना.
3. कंट्रोल रूम और सेडो कंट्रोल रूम की कार्यक्षमता का परीक्षण करना.
4. शत्रुतापूर्ण हमले की स्थिति में खुद को बचाने के लिए नागरिक सुरक्षा पहलुओं पर नागरिकों, छात्रों आदि को प्रशिक्षण देना.
5. क्रैश ब्लैकआउट उपायों का प्रावधान.

6. महत्वपूर्ण संयंत्रों/स्थापनाओं के शीघ्र सुरक्षा देने का प्रावधान.
7. वार्डन सेवाओं, अग्निशमन, बचाव कार्यों और डिपो प्रबंधन सहित नागरिक सुरक्षा सेवाओं की सक्रियता और प्रतिक्रिया को सत्यापित करना.
8. क्रैश ब्लैकआउट उपायों के कार्यान्वयन का आकलन करना.
9.  निकासी योजनाओं की तैयारी और उनके क्रियान्वयन का मूल्यांकन करना.
10. पत्र में कहा गया है, “इस अभ्यास का आयोजन गांव स्तर तक करने की योजना बनाई गई है. इस अभ्यास का उद्देश्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नागरिक सुरक्षा तंत्र की तैयारी का आकलन करना और उसे बढ़ाना है.”

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