हरियाणा में मानसून की सक्रियता अब कम होने लगी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा 19 सितंबर को राजस्थान के रामगढ़, मोहनगढ़, फलौदी और खाजूवाला तक पहुंच गई है। इसके साथ ही राजस्थान के ऊपर एंटीसाइक्लोन बनने से हरियाणा में हवाओं के रुख में बदलाव की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अब पूर्वी की जगह पश्चिमी हवाएं चल सकती हैं। इससे मानसून टर्फ की उत्तरी सीमा दक्षिण की ओर मध्य भारत की तरफ खिसकने की संभावना है।

हिसार स्थित हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवसर्सिटी (HAU) के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ के अनुसार, प्रदेश में मानसून की सक्रियता में कमी आने के साथ इसकी वापसी की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की संभावना है। अगले पांच दिनों यानी 25 सितंबर तक हरियाणा में मौसम सामान्य तौर पर परिवर्तनशील, लेकिन मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है। 20 सितंबर को हरियाणा के लिए किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है और मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। आगामी दिनों में भी मानसून की गतिविधि कमजोर रहने से बारिश के आसार कम रहेंगे।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से वातावरण में नमी की मात्रा में भी कमी आएगी। इससे दिन के तापमान में धीरे-धीरे हल्की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि बीच-बीच में हल्के बादल छाए रहने की संभावना बनी रहेगी। सुबह और शाम के समय मौसम में हल्की ठंडक महसूस होने लगेगी।

शनिवार को प्रदेश में अधिकतम तापमान में औसतन 0.8 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। नारनौल में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। महेंद्रगढ़ में 35.4 डिग्री तापमान रहा। प्रदेश में सबसे अधिक 38.9 डिग्री तापमान मेवात के मंडकोला में दर्ज किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार, 19 सितंबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा 27 डिग्री उत्तरी अक्षांश/68 डिग्री पूर्वी देशांतर से लेकर रामगढ़, मोहनगढ़, फलौदी, खाजूवाला और 29.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश/71.5 डिग्री पूर्वी देशांतर तक पहुंच चुकी है। आगामी 3-4 दिनों में राजस्थान के कुछ और हिस्सों के साथ पंजाब तथा सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनने की संभावना है।

मौसम में यह बदलाव खेती के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बारिश की गतिविधियां कम होने और पश्चिमी हवाएं चलने से खेतों में नमी धीरे-धीरे कम होगी। वहीं तापमान बढ़ने से दिन में गर्मी का असर बढ़ सकता है, जबकि सुबह और शाम को हल्की ठंडक का दौर शुरू होने की संभावना है।

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