पानीपत में आज से कोयले से कार्यरत उद्योग बंद हो जायेंगे। यदि कोई उद्योग चलता हुआ मिला तो उसे Seal कर दिया जायेगा. साथ ही जुर्माना भी भरना होगा। जिन क्षेत्रों में PNG की आपूर्ति होने लगी है उन क्षेत्र में कोयला से चलने वाले उद्योग नहीं चलेंगे. पानीपत में सेक्टर 25 पार्ट 1 और दो के साथ सेक्टर 29 पार्ट 1 और दो सहित कुराड में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस ) की आपूर्ति की शुरुआत हो चुकी है। जिन क्षेत्रों में पीएनजी जाना अभी शुरू नहीं हुई है ऐसे उद्योग 31 दिसंबर तक Biogas से काम कर सकते है।
कोयले पर आधारित उद्योग पर पूर्णतया प्रतिबंध है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार चिमनी का एमीशन 80 मिली ग्राम प्रति मीटर क्यूब होने चाहिए। यदि किसी उद्योग का अमिशन इससे ज्यादा है तो उस उद्योग पर कार्यवाही होनी चाहिए। पहले 80- मिली ग्राम प्रति मीटर क्यूब तक चिमनी का एमिशन स्वीकृत था। उद्यमियों की माने तो 1.25 करोड़ का इंस्ट्रूमेंट लगाकर भी 200 मिली ग्राम प्रति मीटर क्यूब का Level आता है।
Exporter उद्योगों के साथ-साथ घरेलू उद्योग पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कमलजीत ने बताया कि ग्रेप में पहला कदम उद्योगों को पीएनजी पर चलवाना है। एक अक्टूबर से यह नियम जारी होगा। पानीपत में अब तक 48 उद्योगों ने PNG के कनेक्शन लिए हैं। 30 सितंबर के बाद बायलर उद्योगों को पीएनजी व बायोमास का इस्तेमाल ईंधन के रूप में करना होगा। सेक्टर 29 पार्ट 1 और पार्ट दो में स्थित उद्योगों का तीन माह तक सीएक्यूएम कमिशन फार एयर क्वालिटी मानिटरिंग ने 650 उद्योगों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी विनय उपाध्याय के नेतृत्व में टीम ने तीन महीने में उ्दयोगों का डाटा इकट्ठा कर लिया है।
औद्योगिक सेक्टर 29 पार्ट एक और पार्ट दो में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरेल गैस) अडानीआइओसीएल पहुंचा रहा है। इन सेक्टरों में पीएनजी लाइन होने के बावजूद भी कुल 48 उद्योगों ने ही सप्लाई का कनेक्शन लिया है। महंगा ईंधन पड़ने के कारण उद्यमी कनेक्शन लेने में रूचि नहीं दिखा रहें। इन सेक्टरों में कनेक्शन होने के कारण अन्य क्षेत्र में अडानी आइओसीएल लाइन बिछाने में असफल है. 30 सितंबर के बाद CQM की टीम उद्योगों का फिर से इंस्पेक्शन करेगी। पता लगाया जाएगा कि किन उद्योगों ने बायोमास की कंसेंट ली है और किसने नहीं। इसके आधार पर ही कार्यवाही की जाएगी. जो उद्योग कोयला व अन्य ईंधन पर आधारित है उन्हें चलने नहीं दिया जाएगा. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बायोमास के लिए कंसेंट रिन्यू किए है।
सभी उद्योगों में व्याकुलता छाई हुई है। दूसरी तरफ मार्केट में भी मंदी है जिसके कारण निर्यातकों के पास आर्डर 50-60 प्रतिशत कम आ रहे हैं। डाइंग प्रिटिंग उद्योगों की बात करें तो वह बंद होने की कगार पर है। उद्यमी अपनी इस समस्या को लेकर सीएक्यूएम की चेयरमैन एमएम कुट्टी से मिल चुके हैं, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ है। एक अक्टूबर से ग्रेप लागू होने जा रहा है। हालांकि एयर क्वालिटी इंडेक्स पीएम 10 का स्तर यदि 200 से ऊपर होता है तभी ग्रेप लागू लागू किया अन्यथा नहीं। पानीपत का वायु गुणवत्ता का स्तर फिलहाल 120-25 चला रहा है. 200 से ऊपर जाने पर यह खतरे का सूचक हो सकता है।
प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी ग्रेप को लेकर तीन अक्टूबर को संबंधित विभागों की VCलेंगे जिसमें ग्रेप को लेकर किए गए प्रबंध के बारे में बातचीत होगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कमलजीत ने बताया कि अभी किसी भी उद्योग को नोटिस नहीं दिया गया है। 200 एसपीएम से ऊपर एयर क्वालिटी का स्तर जाता है तो ग्रेप जारी होगा। बायोमास से चलाने के इच्छुक उद्यमियों की कंसेंट रिन्यू की जा रही है। 30 सितंबर के बाद वही उद्योग चलेंगे जिनमें बायोमास अथवा पीएनजी ईंधन के रूप में प्रयोग हो रही है।
