रोहतक में MBBS स्टूडेंट्स की बाँड पॉलिसी के विरोध में चल रही हड़ताल खत्म करवाने के लिए प्रशासन व छात्र आमने-सामने आ गए हैं। छात्रों ने भूख हड़ताल कर दी है, वहीं मांग नहीं मानने तक विरोध प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी भी दी है। वहीं रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन समर्थन में आ चुकी है। वहीं अन्य संगठनों से भी समर्थन मांगा जा रहा है।

इधर, रोहतक PGIMS प्रशासन हड़ताल को खत्म करने के लिए सख्ती बरतनी आरंभ कर दी है। पंडित भगवत दयाल शर्मा PGIMS के डायरेक्टर ने ऑर्डर जारी करते हुए कहा है कि सभी छात्र हड़ताल को तुरंत समाप्त करें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें 24 घंटे में होस्टल खाली करना होगा। साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

MBBS स्टूडेंट्स ने कहा कि 5 नवंबर को छात्रों को पुलिस और वाटर-कैनन के बल से डराया गया। अब निदेशक द्वारा अभिभावकों को चिट्ठियां भेजी गई। प्रशासन को दिखने लगा है कि छात्रों को सभी ओर से समर्थन मिल रहा है। तो प्रशासन नई कूटनीति के साथ आया है। लेकिन छात्र इसे सफल नहीं होने देंगे।

छात्रों ने कहा कि निदेशक ने एक नोटिस जारी कर धरने पर बैठे सभी MBBS स्टूडेंट्स को डराने के लिए यह निर्णय लिया है कि यदि छात्र धरने से नहीं उठे तो उन्हें हॉस्टल से निकाल दिया जाएगा। साथ ही जो 5 नवंबर की रात छात्रों पर बेबुनियाद एफआईआर दर्ज हुई थी, उसको भी खारिज नहीं किया जाएगा।

बॉन्ड पॉलिसी का विरोध कर रहे MBBS स्टूडेंट्स के प्रतिनिधिमंडल ने सर्किट हाउस में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मुलाकात करके अपनी मांग रखी। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस संबंध में चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और इसका समाधान निकालेंगे। मुख्यमंत्री से बात करेंगे। छात्रों का कहना है कि उन्हें एक उम्मीद जगी है कि उनकी मांगे पूरी हो सकती है। लेकिन जब तक मांगे पूरी नहीं होंगी उनकी हड़ताल इसी तरीके से जारी रहेगी।

MBBS स्टूडेंट्स ने कहा कि दीक्षांत समारोह के वक्त छात्रों की मुख्यमंत्री से मीटिंग हुई थी। उस समय बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि छात्रों पर किसी भी प्रकार की कोई कागजी कार्रवाई ना की जाए। लेकिन अब सरकार और कॉलेज प्रशासन इस सबको भूलकर छात्र एकता पर चोट करना चाहते हैं।

1 नवंबर को शुरू किया था धरना
MBBS स्टूडेंट्स ने रोहतक पीजीआइ में बाँड पॉलिसी के विरोध में 1 नवंबर को धरना आरंभ किया था। जो लगातार जारी है। इस 25 दिन के अंतराल में विद्यार्थियों ने अलग-अलग तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।

4 साल में देने होंगे 40 लाख
सरकार ने MBBS स्टूडेंट्स पर नई बाँड पॉलिसी लागू की है। जिसके तहत छात्रों को पढ़ाई के दौरान प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए के बाँड देने होंगे। जिसके तहत विद्यार्थियों को कुल 40 रुपए देने होंगे। जबकि प्रतिवर्ष करीब 80 हजार रुपए फीस लगती थी। वहीं इस पॉलिसी के तहत MBBS स्टूडेंट्स को 7 साल तक सरकारी संस्थानों में सेवाएं देनी होंगी। जबकि छात्रों की मांग है कि 40 लाख की राशि का बाँड हटाया जाए। साथ ही वे सेवा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन सरकारी संस्थाओं में ड्यूटी करने की अवधि 7 साल से घटाकर एक साल की जाए। क्योंकि अगले वर्ष नए छात्र मिल जाएंगे।

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