रोहतक। हरियाणा के रोहतक जिले में चार साल की बच्ची से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में करीब डेढ़ महीने की जांच के बाद नया मोड़ सामने आया है। शुरुआत में बच्ची के पिता ने स्कूल में पढ़ने वाले एक लड़के पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन पुलिस जांच और बाल कल्याण समिति (CWC) की काउंसलिंग के दौरान मामले में पिता की भूमिका सामने आने का दावा किया गया। पुलिस ने बच्ची के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में स्कूल को बदनाम करने और पैसे ऐंठने की साजिश रचने का आरोप भी सामने आया है, जिसकी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी है।
16 सितंबर को दर्ज हुई थी शिकायत
मामले की शुरुआत 16 सितंबर को हुई, जब बच्ची की मां ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के अनुसार, चार साल की बच्ची नजदीकी गांव के एक निजी स्कूल में पढ़ती थी। 15 सितंबर को स्कूल से घर लौटने के बाद बच्ची के प्राइवेट पार्ट में सूजन दिखाई दी थी।
परिजनों ने बच्ची से पूछताछ की तो उसने कथित तौर पर बताया कि स्कूल में पढ़ने वाला एक लड़का उसे बिस्किट देने के बहाने बाथरूम में ले गया था और उसके साथ गलत काम किया था। इसके बाद बच्ची के पिता ग्रामीणों के साथ स्कूल पहुंचे और हंगामा किया। स्कूल प्रबंधन ने आरोपों से इनकार करते हुए सीसीटीवी फुटेज भी चेक कराए थे।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान पिता पर गहराया शक
पुलिस ने मामले की जांच के लिए महम के डीएसपी तनुज शर्मा के नेतृत्व में कार्रवाई की। जांच के दौरान साइबर सेल की मदद भी ली गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस को बच्ची के पिता की इंटरनेट गतिविधियों से जुड़े कुछ तथ्य मिले, जिसके बाद जांच की दिशा बदल गई।
जांचकर्ताओं ने कथित घटना के समय, मोबाइल फोन पर देखी गई सामग्री और परिवार के सदस्यों की गतिविधियों का मिलान किया। इन तथ्यों के आधार पर पिता की भूमिका को लेकर संदेह गहराया। इसके बाद बच्ची से दोबारा बातचीत की गई और बाल कल्याण समिति की मदद से मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।
मजिस्ट्रेट ने खिलौनों और चॉकलेट के जरिए बच्ची से की बातचीत
बाल कल्याण समिति के चेयरमैन एडवोकेट सतीश कौशिक के अनुसार, बच्ची ने अलग-अलग मौकों पर पूछताछ के दौरान अलग-अलग बातें बताई थीं। कुछ अवसरों पर वह पहले दिए गए बयान से भी मुकर गई थी। इसके पीछे परिजनों के दबाव की आशंका जताई गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के दौरान उसे सहज महसूस कराने के लिए खिलौनों और चॉकलेट की मदद ली गई। खेल-खेल में बातचीत के दौरान बच्ची से कथित घटना के बारे में पूछा गया। इस दौरान उसने अपने पिता का नाम लिया।
इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी। हालांकि, नाबालिग के बयान और उनसे जुड़े निष्कर्षों का मूल्यांकन जांच के अन्य साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जाना जरूरी है।
बच्ची के कपड़े भी किए गए बरामद
पुलिस जांच में बच्ची के कुछ कपड़े बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इन कपड़ों पर खून के निशान थे। आरोप है कि कपड़ों को पहले साफ करने की कोशिश की गई थी।
इन कपड़ों और अन्य साक्ष्यों की जांच मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, खून के निशानों का कारण और उनसे जुड़े निष्कर्षों की पुष्टि फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही की जा सकती है।
मां पर भी लगा साक्ष्य छिपाने का आरोप
मामले में बच्ची की मां की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिता ने कथित घटना के बारे में अपनी पत्नी को बताया था। इसके बाद दोनों के बीच विवाद होने की बात भी सामने आई।
पुलिस को संदेह हुआ कि मामले की वास्तविकता छिपाने में मां की भूमिका हो सकती है। इसी आधार पर पुलिस ने बच्ची के माता-पिता को गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत रोहतक जेल भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पोर्न साइट देखने की गतिविधि भी जांच का हिस्सा बनी
जांच के दौरान पुलिस ने पिता के मोबाइल फोन और इंटरनेट गतिविधियों की पड़ताल की। रिपोर्ट के अनुसार, पिता द्वारा अश्लील वेबसाइट देखने से जुड़े तथ्य सामने आए। पुलिस ने संबंधित समय और परिवार के सदस्यों की लोकेशन का मिलान किया, जिससे संदेह और गहरा गया।
हालांकि, किसी व्यक्ति की इंटरनेट गतिविधि अपने आप में अपराध का निर्णायक प्रमाण नहीं होती। मामले में इसकी प्रासंगिकता अन्य साक्ष्यों के साथ जांची जानी है।
स्कूल को बदनाम करने की साजिश का भी दावा
मामले में एक गंभीर आरोप यह भी सामने आया कि बच्ची के माता-पिता स्कूल को बदनाम करने और उससे पैसे ऐंठने के उद्देश्य से आरोप लगा रहे थे। शुरुआत में स्कूल के खिलाफ प्रदर्शन और हंगामा भी हुआ था।
हालांकि, इस कथित साजिश के उद्देश्य और उससे जुड़े आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। स्कूल प्रबंधन की भूमिका या किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के आधिकारिक निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
रोहतक के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली चार साल की बच्ची के मामले में शुरुआत में स्कूल के एक छात्र पर आरोप लगाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। करीब डेढ़ महीने की जांच, साइबर गतिविधियों की पड़ताल और बच्ची की काउंसलिंग के बाद जांच की दिशा बदल गई। पुलिस ने बच्ची के पिता और मां को गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल जांच के निष्कर्षों, फॉरेंसिक साक्ष्यों और न्यायालय में पेश किए जाने वाले प्रमाणों से जुड़े हैं। बच्ची की पहचान और उसकी निजता की रक्षा करना जरूरी है। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।


