पंचकूला/हरियाणा। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की प्रदेशव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन भी बिजली संकट गहराया हुआ है। प्रदेश के 15 जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आम लोगों को बिजली और पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की पहल की है। कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने भी बातचीत का न्योता स्वीकार कर लिया है। दोनों पक्षों के बीच शुक्रवार दोपहर 3 बजे पंचकूला रेस्ट हाउस में बैठक प्रस्तावित है।
निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के विरोध में की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे सरकारी बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है और भविष्य में किसानों व आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी पर भी असर पड़ने की आशंका है।
बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा का कहना है कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के बिजली क्षेत्र और आम जनता के हितों से भी जुड़ी है।
अनिल विज ने दिया बातचीत का न्योता
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने सोशल मीडिया के माध्यम से हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से ड्यूटी पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। इसमें विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई करने का विकल्प भी शामिल है।
मंत्री के इस प्रस्ताव पर कर्मचारी नेताओं ने सहमति जताई है। मोर्चा के महासचिव रविंद्र घघस के अनुसार, बैठक में निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस और कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा होगी। सरकार की ओर से इस मामले में आगे क्या फैसला लिया जाता है, यह बैठक के बाद स्पष्ट होगा।
धारा 108 के इस्तेमाल पर टिकी नजरें
विवाद में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 महत्वपूर्ण हो गई है। इस धारा के तहत राज्य सरकार जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों पर राज्य विद्युत नियामक आयोग को लिखित निर्देश दे सकती है।
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार इस प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले पर कार्रवाई करे। हालांकि, लाइसेंस रद्द होने को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण के फैसले पर निर्भर करेगी।
15 जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित
हड़ताल के पहले दिन प्रदेश में बिजली व्यवस्था पर व्यापक असर देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, 33 केवी के 118 और 11 केवी के 510 से अधिक फीडरों में ब्रेकडाउन हुआ। दूसरे दिन भी कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रहने से लोगों की परेशानियां बढ़ गईं।
हिसार: सेक्टर-13, सेक्टर-16-17, मॉडल टाउन और अर्बन एस्टेट समेत कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली गुल रही। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली नहीं आने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
झज्जर: शहर की कई कॉलोनियों और आसपास के गांवों में बिजली संकट बना हुआ है। सासरोली पावर हाउस से सप्लाई बंद होने के कारण कई गांव प्रभावित हुए। बिजली संकट के चलते सीएनजी पंपों पर भी असर पड़ने की सूचना है।
फरीदाबाद: एनआईटी-2, टीटू कॉलोनी, पल्ला और सारण सहित कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। परेशान लोगों ने देर रात सड़क पर जाम लगाकर विरोध जताया।
यमुनानगर-जगाधरी: कई कॉलोनियों और गांवों में बिजली गुल रहने से पानी की आपूर्ति और घरेलू कामकाज प्रभावित हुए। कुछ स्थानों पर लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
गुरुग्राम: बिजली संकट के कारण कई इलाकों में लोगों और दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ स्थानों पर लोगों ने रात में भी विरोध जताया।
वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं दे पाई राहत
हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पटवारियों, ग्राम सचिवों और अन्य उपलब्ध कर्मियों की मदद लेने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर आईटीआई विद्यार्थियों को भी ड्यूटी पर लगाने से जुड़े पत्र सामने आए। हालांकि, तकनीकी फॉल्ट और फीडरों में खराबी के कारण बिजली व्यवस्था बहाल करने में मुश्किलें बनी रहीं।
अब बैठक पर टिकी प्रदेश की नजरें
बिजली संकट के बीच सरकार और कर्मचारी संगठनों की बैठक को अहम माना जा रहा है। कर्मचारियों की मुख्य मांग निजी कंपनी को दिए गए बिजली वितरण लाइसेंस के फैसले पर पुनर्विचार करना है। वहीं, सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने का संकेत दिया है।
अब देखना होगा कि दोपहर 3 बजे होने वाली बैठक में कोई सहमति बनती है या नहीं और प्रदेश के लोगों को बिजली संकट से कब तक राहत मिल पाती है।

