उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक दर्दनाक खबर आई है, जहां पृथ्वी नाथ मंदिर दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो गाड़ी नहर में गिर गई। इस हादसे में 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घटना मोतीगंज थाना क्षेत्र की है और हादसे की सबसे बड़ी वजह ओवरलोडिंग बताई जा रही है।

बताया गया है कि हादसे वाली बोलेरो गाड़ी 7 सवारियों के लिए बनाई गई थी, लेकिन इसमें कुल 15 लोग सवार थे। यानि कि गाड़ी में 8 लोग अधिक बैठे थे। अधिक भीड़ की वजह से गाड़ी का संतुलन बिगड़ा और वह अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरी। गाड़ी में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि जो लोग गाड़ी में थे, वे पानी में फंस गए और बाहर निकल नहीं पाए। इस वजह से 11 लोगों की मौत हो गई।

मोटर वाहन नियमों के अनुसार किसी भी गाड़ी में निर्धारित क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाना गैरकानूनी है। ऐसा करने पर चालक और वाहन मालिक दोनों जिम्मेदार होते हैं। बावजूद इसके ग्रामीण इलाकों में इस नियम का पालन नहीं होता, खासकर त्योहार, धार्मिक आयोजन या शादी-ब्याह के समय ओवरलोडिंग आम बात बन जाती है।

इस हादसे ने प्रशासन की लापरवाही भी सामने ला दी है। सवाल उठता है कि इतने ज्यादा लोगों को लेकर गाड़ी चल रही थी तो क्या पुलिस या परिवहन विभाग की जांच या चेकिंग क्यों नहीं हुई? अगर समय रहते गाड़ी को रोका जाता तो शायद इतनी बड़ी दुर्घटना टल सकती थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही घायल लोगों के बेहतर इलाज की व्यवस्था करने को कहा गया है। जिला प्रशासन पीड़ित परिवारों से लगातार संपर्क में है और हर संभव मदद कर रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घटना की गहराई से जांच करने और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के आदेश भी दिए हैं।

पुलिस हादसे की पूरी जांच कर रही है और कारणों का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले की विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी। यह हादसा गोंडा और पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ा सदमा है और यह याद दिलाता है कि नियमों का पालन करना कितना जरूरी है ताकि इस तरह के दर्दनाक हादसे न हों।  

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