कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी का त्योहार मनाया जाता है। देवउठनी एकादशी में भगवान विष्णु 4 महीने की योगनिद्रा के बाद जागते हैं। इसलिए इस एकादशी के व्रत और पूजा का बहुत ही महत्व बताया गया है। इस बार देवउठनी एकादशी 4 नवंबर के दिन मनाई जाएगी। यदि आप इस एकादशी का व्रत रखने वाले हैं तो पारण 5 नवंबर को होगा। इस दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह भी रचाया जाता है। माना जाता है कि यदि देवउठनी एकादशी पर मां तुलसी का विवाह किया जाए तो देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनती है। पूजा में कुछ सामग्री को शामिल करना भी जरुरी है। इन सामग्रियों के बिना पूजा अधूरी है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में..

तुलसी विवाह यदि आप करवाने वाले हैं तो पूजा का मंडप तैयार करें। मंडप तैयार करने के लिए आप गन्ने का इस्तेमाल करें। इसके बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु की तस्वीर और तुलसी का पौधा रखें। इसके बाद पूजा में धूप, दीपक, वस्त्र, माला, फूल, सुहाग का सामान, लाल चुनरी, साड़ी, हल्दी, मूली, आंवला, बेर, शकरकंद, सिंघाड़ा, सीताफल, अमरुद और मौसमी का फल रखें। 

आप तुलसी विवाह के लिए शुभ मुहूर्त जरुर चुनें। घर के आंगन, छत और बालकनी को अच्छे से साफ करके उसमें गन्ने का मंडप तैयार कर लें। शाम के समय में आप भगवान श्रीहरि और मां लक्ष्मी के आगमन के लिए रंगोली बनाएं। विधि-विधान से शादी करें। फेरे करवाएं। घी के 11 दीप जगाएं। गन्ना, अनार, केला, सिंघाड़ा, लड्डू, पतासे, मूली आदि मौसमी फल और नवीन धान्य आदि चीजें अर्पित करें। विवाह के गीत भी जरुर गाएं। इसके बाद तुलसी नामाष्टक और विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। विधि-विधान से विवाह करवाने से आपको पुण्य मिलेगा। जीवन में भी सुख-समृद्धि आएगी। 

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