ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी इस बार 31 मई को है। कहते है कि यदि आप पूरे साल एक भी एकादशी का व्रत नहीं रखते है लेकिन आप निर्जला एकादशी का व्रत रख लेते है तो आपको संपूर्ण एकादशियों का फल स्वत ही प्राप्त हो जाता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। निर्जला यानि यह व्रत बिना जल ग्रहण किए और उपवास रखकर किया जाता है। इसलिए यह व्रत कठिन तप और साधना के समान महत्त्व रखता है। इस व्रत के प्रभाव से प्राणी जीवन-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है।

निर्जला यानि यह व्रत बिना जल ग्रहण किए और उपवास रखकर किया जाता है। इसलिए यह व्रत कठिन तप और साधना के समान महत्त्व रखता है। इस व्रत के प्रभाव से प्राणी जीवन-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है। वहीं कुछ पंडितों का कहना है कि ज्येष्ठ के महीने में बहुत गर्मी होती है इसीलिए दान के रूप में ब्राह्मणों गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र, बिस्तर, छाता या जल दान करना चाहिए यानी राहगीरों को पानी पिलाना चाहिए।

इसके साथ उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के साथ-साथ इस दिन लक्ष्मी स्वरूप तुलसी की पूजा भी की जाती है। भगवान को आराध्य मानते हुए दूध, दही, शक्कर आदि से पूजन -अभिषेक करना चाहिए। ध्यान रहे एकादशी के दिन पानी नहीं पीना चाहिए और द्वादशी को भगवान विष्णु की आराधना के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। मानयता है कि एकादशी और रविवार के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। तुलसी की पूजा करनी है तो तीन-चार दिन पहले पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए । बता दें कि निर्जला एकादशी के दिन दान करने से लाभकारी फल मिलते हैं।

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