हरियाणा के पंचकूला नगर निगम में सामने आए 79.46 करोड़ रुपए के फंड गबन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए IAS अधिकारी राम कुमार (आरके) सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। घोटाले के दौरान आरके सिंह पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। CBI का दावा है कि नगर निगम की राशि को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर निकालकर शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर करने की साजिश में उनकी भूमिका सामने आई है।

CBI के अनुसार यह मामला फरवरी 2026 में उजागर हुए बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। जांच में सामने आया कि कई सरकारी विभागों के खाते IDFC फर्स्ट बैंक, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसी निजी बैंकों की शाखाओं में खोले गए थे। इसके बाद सरकारी धन को कथित तौर पर फर्जी लेनदेन के जरिए शेल कंपनियों में पहुंचाया गया।

साइन किए चेकों से निकाले गए करोड़ों

जांच एजेंसी का आरोप है कि तत्कालीन नगर हैनिगम कमिश्नर आरके सिंह ने फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के नाम पर कई हस्ताक्षरित चेक बिचौलियों के माध्यम से बैंक अधिकारियों को सौंप दिए थे। इन चेकों के जरिए नगर निगम के खाते से करोड़ों रुपए निकाल लिए गए, लेकिन कोई भी एफडी नहीं बनाई गई।

CBI का दावा है कि निकाली गई राशि को बैंक अधिकारियों द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। एजेंसी के मुताबिक यह पूरा खेल तत्कालीन कमिश्नर और नगर निगम के सीनियर अकाउंटेंट सुरेंद्र जैन की जानकारी एवं सक्रिय भागीदारी से हुआ। इस मामले में सुरेंद्र जैन को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

घरों पर छापेमारी, दस्तावेज बरामद

CBI ने बताया कि आरके सिंह की भूमिका के पर्याप्त सबूत मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के साथ ही उनके चंडीगढ़ और करनाल स्थित आवासों पर तलाशी अभियान चलाया गया। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और कथित आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

अप्रैल में हो चुके हैं सस्पेंड

मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने 9 अप्रैल 2026 को आरके सिंह को निलंबित कर दिया था। सस्पेंशन से पहले वह राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव और पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे। उन्होंने जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक पंचकूला नगर निगम कमिश्नर का कार्यभार भी संभाला था।

504 करोड़ के बड़े घोटाले से जुड़ा मामला

CBI के अनुसार पंचकूला नगर निगम का 79.46 करोड़ रुपए का घोटाला सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में हुए 504 करोड़ रुपए के बड़े फंड घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों की रकम फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में भेजी गई।

हरियाणा सरकार के अनुरोध पर CBI ने यह जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। एजेंसी अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें निजी बैंकों के अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, कंपनियां और निजी व्यक्ति शामिल हैं।

CBI की जांच का दायरा बढ़ा

CBI इसी बैंक शाखा से जुड़े चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी (CSCL) और CREST चंडीगढ़ के फंड घोटालों की भी जांच कर रही है। दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि CREST मामले में एक वरिष्ठ IFoS अधिकारी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!