रंगों का त्योहार होली आने वाला है। फाल्गुन महीने की कृष्णा पक्ष की प्रतिपदा तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। इस साल होली 08 फरवरी को मनाई जाएगी। होली से 08 दिन पहले ही होलाष्टक लग जाता है। इस बार होलाष्टक 28 फरवरी मंगलवार से लगने वाला है। 07 मार्च मंगलवार को होलिका दहन किया जाएगा। सनातन धर्म में फाल्गुन महीने में पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।

हिंदू धर्म की मानें तो होलिका दहन की तिथि 07 मार्च मंगलवार को शुरु होगी। वहीं होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 06 मार्च शाम 04:17 से शुरु होगा और अगले दिन यानी  07 मार्च शाम 06:09 तक रहेगा। 

 होलिका दहन करने के लिए किसी पेड़ की शाखा को जमीन में गाड़कर उसे चारों ओर से लकड़ी, कंडे या उपले से ढक दें। इन सारी चीजों को शुभ मुहूर्त में जलाएं। इसमें छेद वाले गोबर के उपले, गेंहू की नई बालियां और उबटन भी डाला जाता है। माना जाता है कि इन सब चीजों को जलाने से साल भर व्यक्ति को आरोग्य मिलता है और सारी बुरी बलाएं भी होली के साथ ही आग में जल जाती हैं। होलिका दहन पर लकड़ी की राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की भी परंपरा है। होलिका दहन को कई जगहों पर छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। 

फाल्गुन महीने की पूर्णिमा की बुराई पर अच्छाई की जीत को याद करते हुए होलिका दहन किया जाता है।  पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान भगवान विष्मु का परम भक्त था परंतु यह बात हिरण्यकश्यप को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी। उसने प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से दूर करने का काम अपनी बहन होलिका को दिया। होलिका को वरदान मिला था कि अग्नि उसके शरीर को जला नहीं सकती। अपने भतीजे प्रह्लाद को मारने के लिए होलिका उसे अपनी गोद में लेकर आग में प्रविष्ट हो गई परंतु प्रह्लाद की अटूट भक्ति के फलस्वरुप होलिका खुद ही आग में जल गई। अग्नि में प्रह्लाद के शरीर को कोई नुकसान नहीं हुआ। तभी से होली के दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। 

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