हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास शुरू हो चुका है। यह साल का आखिरी महीना है जो 7 मार्च तक रहेगा। इन दिनों शुक्ल पक्ष होना शुभ माना जा रहा है। हिंदू कैलेंडर के आखिरी दिनों यानी फाल्गुन शुक्ल पक्ष में महत्वपूर्ण व्रत-उपवास और त्योहार होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष विधान है। फाल्गुन को ऊर्जा और यौवन का महीना माना जाता है। इस दौरान वातावरण खुशनुमा हो जाता है और हर जगह नई उमंग छा जाती है। धार्मिक दृष्टिकोण से भी यह बहुत ही शुभ है।
फाल्गुन शिव जी, श्री कृष्ण और चंद्र देव की पूजा-उपासना का समय होता है। होली, महाशिवरात्रि आदि प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। आयुर्वेद सहित कुछ ग्रंथों में इस बात का जिक्र है कि इन दिनों शीतल जल से स्नान करना चाहिए यानी न ज्यादा गर्म और न ही ज्यादा ठंडा। अनाज का प्रयोग कम, फलों का अधिक सेवन करना चाहिए। तामसिक भोजन से परहेज करें। बसंत ऋतु होने से रंगीन और सुंदर कपड़े पहनने चाहिए। 27 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो जाएगा जो 7 मार्च तक रहेगा। इन दिनों शादी, शगुन की रस्में, घर प्रवेश, वाहन और घर खरीदने पर रोक लग जाती है।
होलाष्टक के दिनों में घर की जरूरत का छोटा-बड़ा सामान खरीदा जा सकता है, लेकिन विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ काम इन दिनों में न किए जाए तो ज्यादा बेहतर रहता है। ये समय पूजा-पाठ के लिहाज से बहुत अच्छा रहता है। अपने इष्टदेव के मंत्रों का जप करें। ग्रंथों का पाठ करें। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं।
- फाल्गुन माह के शुरू होते ही सर्दियां खत्म होने लगती हैं और गर्मी के मौसम का आगाज होता है। ऐसे में शीतल या सामान्य जल से स्नान करें।
- अनाज के बजाय फलाहार भोजन ज्यादा करना चाहिए।
- भगवान शिव और भगवान श्री कृष्ण की नियमित उपासना करें। साथ ही पूजा में फूलों का अधिक प्रयोग करें।
- मांस-मछली या नशीली चीजों का सेवन न करें। वाणी पर संयम रखें और क्रोध से बचें।
- यह आनंद और उल्लास का महीना है। मान्यता है कि बसंत ऋतु होने की वजह से लोगों के प्रेम संबंधों एवं व्यक्तिगत संबंधों में सुधार होने लगता है। इसलिए हर किसी से प्रेम पूर्वक व्यवहार करें।27 फरवरी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हो जाएगा जो 7 मार्च को होलिका दहन के बाद खत्म हो जाएगा। होलाष्टक शुरू होते ही मांगलिक कामों पर रोक लग जाएगी। इन 8 दिनों में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाएंगे। ऐसी मान्यता है। इन दिनों भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करने से किसी भी तरह का अशुभ नहीं होता।
