पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में होमगार्ड विभाग के अधिकारी विजयपाल सिंह को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
यह मामला महेंद्रगढ़ जिले में तैनात होमगार्ड कर्मचारियों से कथित रूप से रिश्वत वसूली से जुड़ा है। एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता अशोक, जो स्वयं होमगार्ड में कार्यरत है, ने आरोप लगाया कि विभाग में कार्यरत राकेश कर्मचारियों से महेंद्रगढ़ में ड्यूटी लगाने और बिना ब्रेक ड्यूटी जारी रखने के बदले हर तिमाही 6 हजार रुपये की रिश्वत मांगता था।
शिकायत में कहा गया है कि रिश्वत की रकम कर्मचारी सतवीर के माध्यम से इकट्ठी की जाती थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नवंबर और दिसंबर 2025 के दौरान उससे कई किस्तों में पैसे लिए गए और जनवरी 2026 में भी बाकी रकम की मांग की गई। जब रकम कम करने की बात कही गई तो बताया गया कि यह पैसा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है।
सुनवाई के दौरान विजयपाल सिंह की ओर से दलील दी गई कि उनका नाम मूल एफआईआर में नहीं था और उन्हें केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर मामले में शामिल किया गया है। साथ ही उनके खिलाफ रिश्वत मांगने या पैसे लेने का कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को पर्याप्त मानते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद जांच एजेंसी अब कानून के अनुसार मामले में आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
हाईकोर्ट के इस आदेश को भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
