रोहतक, 09 मई 2026। हरियाणा सरकार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के मार्गदर्शन में पीजीआईएमएस रोहतक ने गंभीर एवं अंतिम अवस्था के मरीजों के लिए एक ऐतिहासिक और मानवीय कदम उठाया है। संस्थान में जल्द ही 30 बेड का समर्पित पैलिएटिव केयर वार्ड शुरू किया जाएगा, जहां मौत के करीब पहुंच चुके मरीजों को दर्द से राहत, सम्मान और गरिमामयी देखभाल मिलेगी। यह सुविधा हरियाणा के किसी भी सरकारी अस्पताल में पहली बार शुरू हो रही है।

कुलपति प्रो. डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने सुझाव दिया था कि ऐसे मरीज जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं – जो खाना नहीं खा पा रहे, असहनीय दर्द से कराह रहे हैं, और जिन्हें परिवार वाले भी घर पर इतनी तकलीफ में संभाल नहीं पा रहे – उनके लिए एक विशेष वार्ड की सख्त जरूरत है। हमने डॉ. मित्तल के इस मानवीय सुझाव को तुरंत स्वीकार किया। डॉ अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव जी की सोच है कि हरियाणा का हर नागरिक सम्मान से जिए और सम्मान से ही अंतिम विदा ले। इसी सोच के तहत मेडिसिन विभाग में बच्चों और बड़ों दोनों के लिए 30 बेड का अलग पैलिएटिव केयर वार्ड बनाया जाएगा।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पैलिएटिव केयर केवल इलाज नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता सुधारने का विज्ञान है। यह उस मरीज और उसके परिवार का दर्द कम करने का तरीका है जो जीवन के लिए खतरा बनी बीमारी से जूझ रहा है। दर्द, बेचैनी, सांस की तकलीफ के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक पीड़ा का भी इलाज इसमें शामिल है। अब तकनीक इतनी बढ़ गई है कि हम मौत को टाल सकते हैं, पर क्या मरीज को अनावश्यक पीड़ा देना उचित है? हर व्यक्ति को सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार है।डॉ अग्रवाल ने कहा कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा, छोटे परिवार, बच्चों का दूर रहना और न्यूक्लियर फैमिली के दौर में पैलिएटिव केयर अब विलासिता नहीं, जरूरत है।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने इस वार्ड की कार्यप्रणाली स्पष्ट करते हुए बताया कि इसमें मरीज सीधा भर्ती नहीं होगा। मरीज पहले अन्य वार्डों में सामान्य मरीजों की तरह भर्ती होंगे। जब इलाज कर रहे डॉक्टर को लगेगा कि बीमारी अब अंतिम अवस्था में पहुंच गई है और मरीज को क्यूरेटिव ट्रीटमेंट से ज्यादा दर्द निवारण और देखभाल की जरूरत है, तब उसे इस पैलिएटिव वार्ड में रेफर किया जाएगा।

डॉ. मित्तल ने भावुक होते हुए कहा, हमने अक्सर देखा है कि कैंसर, अंग फेलियर या बुढ़ापे की अंतिम अवस्था में मरीज दर्द से तड़पता है। घरवाले बेबस होकर उसे देखते हैं। न घर पर संभाल पाते हैं, न अस्पताल में जगह मिलती है। कई बार प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज को आईसीयू में मशीनों पर रखने से परिवार को समय ओर आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है । यह वार्ड उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनेगा। यहां मेडिसिन, एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक्स और सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की संयुक्त टीम मरीज की सेवा करेगी।

डॉ कुंदन मित्तल ने बताया कि अभी तक हरियाणा के किसी भी सरकारी हॉस्पिटल में इस तरह की समर्पित सुविधा उपलब्ध नहीं है। पीजीआईएमएस रोहतक पहला संस्थान होगा जो टर्मिनल केयर को संस्थागत रूप देगा। यह एंड-ऑफ-लाइफ केयर का हिस्सा है, जिसमें मरीज के आखिरी दिनों, हफ्तों या महीनों को जितना संभव हो दर्द-मुक्त और शांतिपूर्ण बनाया जाता है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि क्यूरेटिव और पैलिएटिव इलाज के बीच की कृत्रिम दीवार अब टूट रही है। हर डॉक्टर और नर्स का कर्तव्य है कि वह पैलिएटिव केयर दे। हम सिस्टम को सिर्फ मृत्यु रोकने से आगे ले जाकर पीड़ा कम करने की तरफ ले जा रहे हैं।

इस पैलिएटिव केयर वार्ड के शुरू हो जाने से प्रदेश के हजारों गंभीर रोगियों और उनके परिजनों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। यह पहल हरियाणा को स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगी।

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