हरियाणा कांग्रेस में जिलाध्यक्ष की कुर्सी पाने के लिए अब केवल बड़े नेताओं की सिफारिश या गुटबाजी के भरोसे रहना आसान नहीं होगा। पार्टी हाईकमान ने संगठनात्मक नियुक्तियों में योग्यता और अनुभव को ज्यादा महत्व देने के लिए नई चयन प्रक्रिया तैयार की है। इसके तहत जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों को तीन पन्नों का प्रोफार्मा भरकर 20 से अधिक सवालों के जवाब देने होंगे।
नई व्यवस्था का पहला प्रयोग हिसार जिलाध्यक्ष के चयन में किया जाएगा। यहां जिलाध्यक्ष पद के लिए छह नामों का पैनल सामने आया है। हिसार में इस प्रक्रिया के परिणाम देखने के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी है।
तीन पन्नों में देना होगा पूरा राजनीतिक ‘हिसाब-किताब’
जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों को अपनी शैक्षणिक योग्यता के साथ पार्टी और संगठन में किए गए काम का पूरा ब्योरा देना होगा। तीन पन्नों के प्रोफार्मा में 20 से अधिक सवाल शामिल किए गए हैं। इसके जरिए यह जानने की कोशिश की जाएगी कि दावेदार का कांग्रेस संगठन में कितना अनुभव है और उसने पार्टी के लिए किस स्तर पर काम किया है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य जिलाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर नियुक्ति के दौरान केवल सिफारिश और गुटीय समीकरणों के प्रभाव को कम करना बताया जा रहा है।
हिसार से होगी नए फॉर्मूले की शुरुआत
कांग्रेस हाईकमान सबसे पहले हिसार में इस फॉर्मूले को आजमाने जा रहा है। जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल नेताओं की योग्यता, संगठनात्मक अनुभव और पार्टी में उनकी सक्रियता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद अंतिम नाम पर फैसला लिया जाएगा।
अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो हरियाणा के दूसरे जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के दौरान भी यही प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
संगठन मजबूत करने की कवायद
हरियाणा कांग्रेस लंबे समय से संगठनात्मक नियुक्तियों और गुटबाजी को लेकर चर्चा में रही है। ऐसे में नई व्यवस्था को संगठन में सक्रिय और अनुभवी कार्यकर्ताओं को आगे लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद के बीच जिलाध्यक्षों की नियुक्ति काफी अहम मानी जा रही है। नई प्रक्रिया से अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर सिफारिश का जोर चलता है या पार्टी के तय पैमानों पर खरा उतरने वाला दावेदार बाजी मारता है।
