दाद-दादी भी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। बच्चों का जीवन उनके प्यार और आशीर्वाद के बिना अधूरा है। जब माता-पिता अपने बच्चों को समय नहीं दे पाते तो दादा-दादी भी बच्चों के साथ रहकर उनका ख्याल रखते हैं। वह अपने जीवन के कई सारे अनुभव बच्चों को सिखाते हैं। इसलिए दादा-दादी को सम्मान देने के लिए हर साल ग्रैंड पेरेंट्स डे मनाया जाता है।

ग्रैंड पेरेंट्स डे हर साल कई देशों में अलग-अलग दिनों को मनाया जाता है। अमेरिका में यह दिन मजदूर दिवस के बाद पहले रविवार के रुप में चिह्नित किया जाता है, जिसे सितंबर महीने के पहले सोमवार को मनाया जाता है। ऐसे ही ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, हांगकांग, जापान, फिलीपींस, पोलैंड और बाकी देशों में भी यह दिन अलग-अलग तिथियों पर सेलिब्रेट किया जाता है। 

हर साल सितंबर के दूसरे रविवार को यह दिन बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। मदर्स और फादर्स डे की तरह यह पूरा दिन भी दादा-दादी को समर्पित होता है। तो चलिए आपको बताते हैं कि यह दिन क्यों मनाया जाता है और इसे मनाने की शुरुआत कैसे हुई…

इस दिन का इतिहास 

दादा-दादी के लिए इस मनाए जाने वाले इस खास दिन की शुरुआत 1970 में हुई थी। मैरियन मैकक्वाडे ने दादा-दादी के लिए एक विशेष दिन मनाने का अभियान शुरु किया था। मैरियन मैकक्वाडे एक दादी थी। उनके 43 ग्रैंड चिल्ड्रन थे। वह चाहती थी कि ग्रैंड पेरेंट्स और बच्चों का संबंध अच्छा होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने 1970 में एक अभियान शुरु किया। वह इस दिन को नेशनल हॉलीडे के रुप में बनाना चाहती थी, ताकि इस दिन नाना-नानी, दादा-दादी अपने बच्चों के साथ समय बिता सकें। उनका मानना था कि बच्चों और ग्रैंडपेरेंट्स का बीच का जनरेशन गैप खत्म हो जाए। 9 साल तक मैरियन मैकक्वाडे ने यह अभियान चलाया। इसके बाद अमेरिका के प्रेसिडेंट जिमी कार्टन ने 1979 में ग्रैंड पेरेंट्स डे घोषित कर दिया। इसके बाद सबसे पहले एज यूके नाम की एक चैरिटी ने 1990 में ग्रैंड पेरेंट्स डे सेलिब्रेट किया ।

ग्रैंड पेरेंट्स डे हर साल कई देशों में अलग-अलग दिनों को मनाया जाता है। अमेरिका में यह दिन मजदूर दिवस के बाद पहले रविवार के रुप में चिह्नित किया जाता है, जिसे सितंबर महीने के पहले सोमवार को मनाया जाता है। ऐसे ही ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, हांगकांग, जापान, फिलीपींस, पोलैंड और बाकी देशों में भी यह दिन अलग-अलग तिथियों पर सेलिब्रेट किया जाता है। 

दादा-दादी का बच्चों के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वह अपने पोती-पोतियों के साथ खेलना और उनके साथ समय बिताना बहुत ही ज्यादा पसंद करते हैं। वह अपने अनुभवों के जरिए बच्चों को भी कई बातें सिखाते हैं। यह बातें बच्चों को जीवन में प्रभावी ढंग से जीवन जीने में सहायता करती हैं। 

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