पंजाबी गायक और अभिनेता राजवीर जवंदा के निधन से पंजाब इस समय शोक में डूबा हुआ है। अपने चहेते सितारे को अंतिम विदाई देने हुजूम उमड़ पड़ा, हर किसी की आंखें नम थी और मुंह में यही बात थी रब्बा आपने ऐसा क्यों किया। जहां एक तरफ राजवीर की मां का अपने जवान बेटे के अंतिम संस्कार में रो- रोकर बुरा हाल था तो वहीं उनका मासूम बच्चा अपने बेटे होने का फर्ज निभा रहा था। 

राजवीर जवंदा को लुधियाना स्थित उनके पैतृक गांव पौना में अंतिम विदाई दी गई। बेटे दिलावर ने अपने नन्हे हाथों से पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान वह सिर पर लाल रंग की पगड़ी पहने दिखा। हादसे के बाद सिंगर की भी पहली तस्वीर सामने आई, जिसमें उनके सिर पर ही लाल पगड़ी नजर आई। सिंगर के बेटे की तो सारी दुनिया ही उजड़ गई, इतनी छोटी उम्र में उसके सिर से पिता का साया उठ गया। उस बच्चे को देखकर सभी का यही कहना था कि भगवान किसी के साथ ऐसा ना करे। 

लुधियाना जिले के पौना गांव में जन्मे, जवंदा का एक पुलिस कांस्टेबल से पंजाब के सबसे सम्मानित गायकों में से एक बनने का सफर उनकी कड़ी मेहनत, विनम्रता और संगीत के प्रति जुनून को दर्शाता है। जगराओं के सन्मति विमल जैन स्कूल से स्कूली शिक्षा और डीएवी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला से रंगमंच और टेलीविजन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।  राजवीर 2011 में एक कांस्टेबल के रूप में पुलिस बल में शामिल हुए। उनकी तैनाती जगराओं में थी, लेकिन उन्होंने नौकरी के साथ-साथ संगीत का भी अभ्यास जारी रखा। 2019 में, उन्होंने अपने गायन करियर पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने के लिए इस्तीफा दे दिया।

2020-21 में दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान, राजवीर ने आंदोलन के समर्थन में मंच पर प्रस्तुति दी। ऐसी ही एक प्रस्तुति के दौरान उन्हें अपने पिता के निधन की खबर मिली। इस हृदयविदारक संदेश के बावजूद, उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए जाने से पहले अपना गीत पूरा किया। राजवीर ने 2014 में अपने पहले एल्बम “मुंडा लाइक मी” से अपने संगीत करियर की शुरुआत की। बाद में, उन्होंने गायक मनिंदर बुट्टर के साथ “वैर” गीत के लिए सहयोग किया। उनके 2016 के एल्बम “काली जवंदे दी” ने उन्हें पंजाबी संगीत उद्योग में पहचान दिलाई।

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