हर साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत चतुर्थी तिथि से होती है और समाप्ति अनन्त चतुर्दशी के दिन होती है। इस साल गणेश उत्सव का आखिरी दिन अनन्त चतुर्दशी रहेगा। मंगलवार के दिन चतुर्दशी तिथि में धूम-धाम से बप्पा को विदा किया जाएगा। गणेश जी का आगमन व विदायी शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से किया जाना चाहिए। इस साल 17 सितंबर के दिन अनन्त चतुर्दशी पर कई भक्तजन गणेश विसर्जन करेंगे। आइए जानते हैं गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त व सम्पूर्ण विधि-

इस साल भाद्रपद महीने की अनन्त चतुर्दशी तिथि सितम्बर 16 को दोपहर 3:10 बजे से प्रारंभ होगी, जो सितम्बर 17 को सुबह 11:44 बजे तक समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के अनुसार, 17 सितंबर के दिन अनन्त चतुर्दशी तिथि मान्य होगी। 

17 सितंबर, अनन्त चतुर्दशी के दिन बप्पा के विसर्जन के लिए 4 शुभ चौघड़िया का मुहूर्त रहेगा। धार्मिक दृष्टि से चौघड़िया मुहूर्त किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माने जाते हैं। आइए जानते हैं दृक पंचांग के अनुसार, कल किस टाइम कर सकेंगे विसर्जन-

प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 09:11 से 13:47

अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 15:19 से 16:51

सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – 19:51 से 21:19

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 22:47 से 03:12, सितम्बर 18

गणपति जी की विदाई आदरपूर्वक, विनम्र भाव से पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलती की माफी मांगे और फिर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें. बप्पा की विदाई नदी, झील, तालाब में विसर्जित करने की जगह घर पर ही विसर्जन कर सकते हैं.

  • गणेश विसर्जन वाले दिन बप्पा की विधिवत पूजा करें, कुमकुम हल्दी, मेहंदी, मोदक, पुष्प आदि चढ़ाएं. आरती करें.
  • गणपति के साइज को ध्यान में रखते हुए एक बाल्टी या टब लें. इसे अच्छे से साफ कर लें.
  • बाल्टी में इतना पानी डालें कि गणपति विसर्जित हो जाएं.
  • बप्पा की मूर्ति पूरी तरह से पानी में घुल जाने के बाद इस पानी को गमले में डाल दें. बप्पा की मूर्ति की मिट्टी में पौधे का बीज लगा सकते हैं.
  • जब गणपति को विसर्जन के लिए ले जाएं, तब उन सारी चीजों को पोटली में बांध दें और गणेश जी के साथ ही विसर्जित कर दें.
  • ध्यान गणेश जी की मूर्ति हो या प्रतिमा, इन्हें पानी में धीरे-धीरे विसर्जित करें. एकदम से छोड़ें या पटकें नहीं.
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