रोहतक स्थित PGI में बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में जारी MBBS स्टूडेंट के धरने पर बुधवार को पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहुंचे। उन्होंने MBBS विद्यार्थियों से बातचीत की और बॉन्ड पॉलिसी को लेकर विद्यार्थियों के विचार भी जाने। साथ ही MBBS स्टूडेंट ने अपना मांगपत्र भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सौंपा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने MBBS स्टूडेंट को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को विधानसभा में उठाएंगे। साथ ही बॉन्ड पॉलिसी को वापसी के लिए छात्रों की मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी गलत है, जिससे गरीबों के बच्चे पढ़ाई तक नहीं कर पाएंगे। इसलिए सरकार को विचार करके वापस लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार जो बॉन्ड पॉलिसी लेकर आई है, उससे विद्यार्थियों पर प्रतिवर्ष 10 लाख व 4 साल में 40 लाख रुपए का बोझ पड़ेगा। जिसका खामियाजा गरीब परिवार के बच्चों को उठाना पड़ेगा। इस बॉन्ड पॉलिसी के कारण अब गरीब का बच्चा मेरिट के आधार पर पढ़ाई करके डॉक्टर बनने का सपना भी नहीं देख पाएगा। क्योंकि उस सपने को पूरा करने के लिए 40 लाख रुपए का कहां से लेकर आएगा।
MBBS स्टूडेंट प्रिया कौशिक ने कहा कि देश के किसी भी प्रदेश में हरियाणा की तरह 40 लाख व 7 साल की बॉन्ड पॉलिसी नहीं हैं। कई प्रदेशों में तो बॉन्ड पॉलिसी भी नहीं हैं। जिन प्रदेशों में हैं वहां विद्यार्थियों की सुविधा अनुसार आसान बनाई गई है। लेकिन हरियाणा में छात्र विरोधी बॉन्ड पॉलिसी लागू की गई है।
रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन व MBBS स्टूडेंट ने सरकार को मंगलवार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। साथ ही कहा था कि सरकार 72 घंटे में इस बॉन्ड की शर्त को खत्म नहीं करती है तो MBBS स्टूडेंट अपने आंदोलन को और अधिक बड़े स्तर पर चलाएंगे। उन्हें चंडीगढ़ जाना पड़ा तो भी पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने भी मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी दी।
बता दें कि बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में MBBS स्टूडेंट पिछले 16 दिन से रोहतक PGI में धरने पर बैठे थे। MBBS स्टूडेंट ने 1 नवंबर को प्रदर्शन करके धरना शुरू किया था। उनकी मांग है कि छात्रों पर थौपी गई बॉन्ड पॉलिसी वापस ली जाए। जब तक पॉलिसी वापस नहीं होती है तब तक धरना जारी रखेंगे।
MBBS स्टूडेंट ने कहा कि सरकार 40 लाख की बॉन्ड पॉलिसी लेकर आई है, जो विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी होने से पहले ही कर्जवान बना देगी। अगर कोई विद्यार्थी बैंक के माध्यम से बॉन्ड पॉलिसी लेकर पढ़ाई करता है तो उसकी पढ़ाई पूरी होने के बाद भी उसे 60 हजार रुपए प्रति माह तक की किस्त भरनी होगी। ऐसे में वे बॉन्ड की किस्त भरेंगे या नौकरी करेंगे।
मेडिकल स्टूडेंट ने कहा कि सरकार ने बॉन्ड पॉलिसी की अवधि 7 साल है, लेकिन सरकार के पास पढ़ाई पूरी करने वाले सभी डॉक्टरों के लिए काम तक नहीं हैं। MBBS की पढ़ाई पास कर चुके विद्यार्थियों को सालों नौकरी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सरकार बॉन्ड पॉलिसी के अवधि कम करे और नौकरी की गारंटी भी दी।
– बॉन्ड एग्रीमेंट में से बैंक की दखल अंदाजी पूरी तरह से खत्म की जाए।
– साथ ही बॉन्ड सेवा की अवधि 7 साल से घटाकर अधिकतम 1 वर्ष की जाए।
– ग्रेजुएशन के अधिकतम 2 महीने के अंदर सरकार MBBS ग्रेजुएट को नौकरी प्रदान करे।
– 40 लाख सेवा बॉन्ड राशि को घटाकर 5 लाख रुपए किया जाए
– PG कोर्स (MD/MS) के बारे में स्थिति बिल्कुल साफ की जाए।
