प्रदेश में गैर कानूनी तरीके से चल रहे ब्लड बैंक पर एफडीए ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी के चलते देश का पहला ऐसा मामला रोहतक में दर्ज किया गया है। जब एक फर्जी प्रमाण पत्र वाले डॉक्टर के हवाले ब्लड सेंटर चलाया जा रहा था। इस मामले में एफडीए विभाग के सीनियर ड्रग कंट्रोल ऑफिसर कृष्ण कुमार की ओर से थाना अर्बन एस्टेट में मामला दर्ज करवाया है। शुरुआती जांच में यह भी पाया गया कि ली क्रेस्ट ब्लड सेंटर गाजियाबाद के अधिकृत अस्ताक्षरी संदीप कुमार अहलावत जोकि नोबल ब्लड सेंटर का भी महाप्रबंधक है, सांठगांठ कर डाॅ. दीपक ने फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाया।

एफडीए विभाग की ओर से गठित कमेटी की जांच में यह कथित अनुभव प्रमाण पत्र झूठा, जाली और फैब्रिकेटेड पाया गया। इसका इस्तेमाल करके हरियाणा सरकार के साथ नाजायज फायदा उठाने के लिए धोखाधड़ी करने का मामला पाया गया। रोहतक के सीनियर ड्रग कंट्रोल ऑफिसर ने झज्जर के कुकडौला निवासी डाॅ. दीपक कुमार और अन्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवा दी है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने ब्लड बैंक सेंटर संचालकों को कहा कि वे अपने केन्द्रों का संचालन कानून के दायरे में रहकर करें।

ढाई साल किया गलत संचालन: वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी 7 सितंबर 2022 को सबूत जुटाने व अवैध डाॅक्टर की अाेर से ब्लड सेंटर के संचालन को रोकने के लिए राेहतक के नोबल ब्लड सेंटर अपनी टीम के साथ गए। वहां डाॅ. दीपक की देखरेख में ब्लड सेंटर संबंधित कागजात अपने कब्जे में लिए।

बिना काम किए बनवाया अनुभव प्रमाण-पत्र: ब्लड सेंटर के मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज होशियार सिंह के त्यागपत्र पर उसकी जगह डाॅ. दीपक को मेडिकल ऑफिसर नियुक्त करने की सूचना स्टेट ड्रग कंट्रोलर हरियाणा पंचकूला को दी। साथ ही डाॅ. दीपक के शपथ पत्र के साथ अनुभव प्रमाण पत्र भी उनके कार्यालय में जमा करवाया। इस अनुभव प्रमाण पत्र के अनुसार गाजियाबाद उत्तरप्रदेश में स्थित ली क्रेस्ट ब्लड सेंटर में डाॅ. दीपक को 30 अक्टूबर 2020 से 15 फरवरी 2022 तक कार्यरत दर्शाया गया था।

गाजियाबाद में की जांच: रोहतक जोन के वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी कृष्ण कुमार गर्ग, मेरठ डिवीजन के सहायक आयुक्त एफडीए वीरेंद्र कुमार अाैर गाजियाबाद के ड्रग इंस्पेक्टर अनुरोध कुमार के साथ ली क्रेस्ट ब्लड सेंटर वसुंधरा, गाजियाबाद पहुंचे। वहां मौजूद उप चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. विवेक गर्ग ने बताया कि डाॅ. दीपक कुमार ने ली क्रेस्ट ब्लड सेंटर में काम नहीं किया।

नियमों का किया गया उल्लंघन: नियम के मुताबिक ब्लड सेंटर के स्वतंत्र रूप से मेडिकल ऑफीसर इंचार्ज के पद पर कार्य करने के लिए एमबीबीएस के बाद ब्लड सेंटर में एक वर्ष का अनुभव होना जरूरी होता है। इसके अलावा ब्लड ग्रुप सीरोलॉजी, ब्लड ग्रुप मैथडोलॉजी और रक्त व उसके कम्पोनेंट निर्माण के चिकित्सीय सिद्धांतों का पर्याप्त ज्ञान जरूरी होता है।

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