पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि एक पिता अपनी पत्नी और बच्चों की ‘मेंटेनेंस’ के लिए उत्तरदायी है, विशेषकर तब जब बच्चे नाबालिग हों और पत्नी की कोई स्थायी कमाई न हो। हाईकोर्ट ने मामले में एक आर्मी जवान की उस याचिका को रद करते हुए यह टिप्पणी दी, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी।निचली कोर्ट ने जवान को आदेश दिए थे कि वह अपनी पत्नी और बच्चों की मेंटेनेंस(खर्चे) के रूप में प्रति माह 20 हजार रुपए अंतरिम रूप से(मामले में फैसला सुनाए जाने तक) भरेगा।

नवंबर, 2021 में रोहतक की फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज ने याची को प्रतिमाह अपनी पत्नी को 10 हजार रुपए और दोनों बच्चों को 5-5 हजार रुपए मेंटेनेंस देने के आदेश दिए थे। याची ने हाईकोर्ट में दलील थी कि वह इंडियन आर्मी में नायक के पद पर तैनात है और उसे प्रति माह 50 हजार रुपए सैलरी मिलती है। ट्रायल कोर्ट ने गलत ढंग से उसकी महीने की इनकम 90 हजार रुपए आंकी। इसके आधार पर मेंटेनेंस तय किया। यह काफी ज्यादा है।

मामले में जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि पिता अपने बच्चों और पत्नी के मेंटेनेंस के लिए उत्तरदायी है। वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता, विशेषकर जब बच्चे नाबालिग हों और बच्चों की मां के पास स्थायी कमाई का स्त्रोत न हो। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि याची अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है जिसे कोर्ट स्वीकार और सहन नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने आगे कहा कि तय किया गया मेंटेनेंस अंतरिम है और ट्रायल कोर्ट में याची को अंतिम फैसला सुनाए जाने से पहले अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। वहीं आगे कहा कि जिस प्रकार याची की कमाई और उसकी पारिवारिक स्थिति है, उसे देख कहीं से भी तय मेंटेनेंस ज्यादा तय किया प्रतीत नहीं होता। ऐसे में उसकी याचिका को रद कर दिया गया।

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