दिल्ली में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध की गूंज अब हरियाणा में भी सुनाई देने लगी है। मंगलवार को झज्जर में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने भारी बारिश के बावजूद विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा की।
प्रदर्शन में आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन, कर्मचारी संगठनों और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
बारिश के बीच किया प्रदर्शन
मूसलाधार बारिश के बावजूद कर्मचारी सड़कों पर डटे रहे। उन्होंने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग करना उचित नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाएं दोबारा हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आंगनबाड़ी यूनियन का बड़ा बयान
प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी यूनियन के नेताओं ने कहा कि निहत्थे छात्रों पर लाठियां बरसाकर पुलिस और सरकार ने अपना “क्रूर चेहरा” दिखाया है। इसी दौरान उन्होंने भावनात्मक प्रतिक्रिया देते हुए ऐलान किया कि वे दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस के कर्मचारियों के घर अपनी बेटियों की शादी नहीं करेंगे। यह बयान प्रदर्शन के दौरान सबसे अधिक चर्चा का विषय बना।
अपनी मांगें भी दोहराईं
छात्रों के समर्थन के साथ-साथ आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को भी उठाया। उन्होंने मानदेय बढ़ाने, सेवा शर्तों में सुधार और लंबे समय से लंबित मांगों का जल्द समाधान करने की मांग की। यूनियन नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो राज्यभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।
दिल्ली में क्या हुआ था?
सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़े। पुलिस ने अनुमति न होने और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई तथा लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। घटना के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, जबकि पुलिस का कहना था कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई।
