महेंद्रगढ़ में हुए एक स्कूल बस के हादसे में 6 बच्चों की मौत हो गई। इस हादसे का कारण जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन, इसको लेकर शहर के स्कूलों में लगे वाहनों की पड़ताल की गई तो चौकाने वाली तस्वीर सामने आई। क्योंकि यहां पर भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल संचालक और जिम्मेदार विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं दिखे। आरटीए विभाग में जहां 2000 स्कूल के वाहन पंजीकृत हैं तो इनमें से 30% का फिटनेश नहीं कराया गया। वहीं अधिकांश वाहन ऐसे मिले जिनमें न तो फर्स्ट एड बॉक्स था और न ही आग लगने पर उसे बुझाने के प्रबंध। ऐसे में अगर कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस सवाल का जवाब अफसरों के पास भी नहीं। आरटीए की ओर से पिछले साल सितंबर माह में अभियान चलाया गया था। इस दौरान 20 स्कूली वाहन ऐसे मिले थे जो बिना फिटनेश के सड़क पर दौड़ रहे थे। इनके खिलाफ कार्रवाई के डीसी ने आदेश भी दिए थे। लेकिन, इस अभियान के बाद अधिकारियों ने कोई भी अभियान नहीं चलाया। यही कारण है कि शहर से लेकर देहात क्षेत्र के स्कूलों तक बिना फिटनेस सार्टिफिकेट के वाहन दौड़ाए जा रहे हैंहैं

ईद को लेकर गुरुवार को सरकारी छुट्टी थी। सरकारी संस्थान के सा​थ ही सरकारी स्कूल भी बंद थे। लेकिन, प्राइवेट स्कूलों में इस दिन अवकाश नहीं रहा। डिजिटल भूमि टीम स्कूलों निजी स्कूलों का हाल जानने के लिए पहुंची तो छोटूराम चौक स्थित एक शिक्षण संस्था के अंदर बच्चे मैदान में खेल रहे थे। वहीं डीएलएफ कॉलोनी और आर्यनगर, गांधी कैंप के साथ ही बजरंग फाटक के पास भी शिक्षण संस्थाएं खुली थी। यानि अवकाश के दिन भी 50 प्रतिशत से अधिक प्राइवेट शिक्षण संस्थाएं खुली रहीं। इस बार में जब डीईईओ दिलजीत सिंह से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ब्लॉक से लिस्ट मांगी गई है। जो नियम होंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सितंबर 2023 में विभाग को मिले थे 20 अनफिट वाहन, तब से अभियान नहीं चला

बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता है। जिन वाहनों में नियमों का पालन नहीं मिलेगा उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर शुक्रवार को स्कूल संचालकों के साथ एक बैठक भी होगी। इसके बाद फिटनेस नहीं होने पर सीधे एक्शन लिया जाएगा। गायत्री अहलावत, आरटीए।

स्कूल वाहन के पीछे पुलिस कंट्रोल रूम, फायर विभाग के साथ एंबुलेंस का नंबर। स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए, ताकि वह 40 किमी. प्रति घंटा से अधिक न दौड़े। वाहन के अंदर आग बुझाने के लिए छोटा आग बुझाने वाला सिलेंडर होना चाहिए। वाहन की खिड़कियों पर ग्रिल होरीजेंटल होनी चाहिए।वाहन के अंदर फर्स्ट ऐड बाक्स होना चाहिए। इससे चोट लगने पर बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया जा सके। . हर वाहन में स्कूल का एक अटेंडेंट होना चाहिए।

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