पानीपत। हरियाणा के पानीपत में 27 वर्षीय महिला की मौत के बाद उसके नवजात बेटे को लेकर दो परिवारों के बीच विवाद हो गया। बिहार के छपरा की रहने वाली संध्या की मौत के बाद उसके ससुराल पक्ष के लोग बच्चे को अपने साथ ले जाना चाहते थे, जबकि पड़ोस में रहने वाला परिवार नवजात को अपने पास रखने पर अड़ गया।
पड़ोसी परिवार का दावा था कि उन्होंने संध्या के इलाज पर करीब 70 हजार रुपए खर्च किए और गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म तक उसकी देखभाल की। परिवार ने यह भी कहा कि उनके घर में कोई बच्चा नहीं है, इसलिए नवजात को उनके पास ही रहने दिया जाए। मामला औद्योगिक थाना पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद बच्चा परिजनों को सौंप दिया गया।
बिहार से तीन बच्चों के साथ पानीपत आई थी संध्या
मूलरूप से बिहार के छपरा की रहने वाली संध्या पिछले कई महीनों से पानीपत की सैनी कॉलोनी में रह रही थी। उसके साथ 10 साल की बेटी, 6 साल की दूसरी बेटी और 3 साल का बेटा था। वह एक फैक्ट्री में क्लिपिंग का काम करके परिवार का गुजारा कर रही थी। उसका पति पंकज उससे अलग रहता था।
23 अक्टूबर को दिया चौथे बच्चे को जन्म
23 अक्टूबर को संध्या ने एक बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद उसकी तबीयत खराब रहने लगी। इस दौरान पड़ोसी संजय और उसका परिवार संध्या की मदद करता रहा। परिजनों के अनुसार, वे उसे इलाज के लिए निजी और सरकारी अस्पतालों में लेकर जाते थे। नवजात की देखभाल भी पड़ोसी परिवार कर रहा था।
1 नवंबर को तबीयत बिगड़ने से हुई मौत
1 नवंबर को संध्या को अचानक ब्लीडिंग शुरू हो गई। हालत बिगड़ने पर संजय और उसके परिजन उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत की सूचना मिलने पर बिहार से उसके ससुराल पक्ष के लोग पानीपत पहुंचे। 3 नवंबर को पानीपत में ही संध्या का अंतिम संस्कार किया गया।
पड़ोसी परिवार ने इलाज पर 70 हजार खर्च करने का किया दावा
संध्या की मौत के बाद नवजात बेटे को लेकर विवाद शुरू हुआ। पड़ोसी संजय के परिवार का कहना था कि उन्होंने गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद संध्या की देखभाल की थी। इलाज पर करीब 70 हजार रुपए खर्च किए और नवजात की जिम्मेदारी भी संभाली।
परिवार ने बच्चे को अपने पास रखने की इच्छा जताई। वहीं, बिहार से आए ससुराल पक्ष के लोग बच्चे को अपने साथ ले जाना चाहते थे।
20 हजार रुपए देने पर बच्चे को सौंपने की सहमति
बच्चे को लेकर विवाद बढ़ने पर दोनों पक्ष औद्योगिक थाना पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में बातचीत हुई। इसके बाद 20 हजार रुपए देने पर सहमति बनी और पड़ोसी परिवार ने नवजात को परिजनों के हवाले कर दिया।
पुराना औद्योगिक थाना प्रभारी अरविंद ने बताया कि पुलिस को मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी। दोनों पक्षों के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद था, जिसे बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया।
नवजात की देखभाल और कस्टडी को लेकर उठे सवाल
महिला की मौत के बाद नवजात की देखभाल और उसे अपने पास रखने को लेकर दोनों परिवारों के बीच विवाद सामने आया। फिलहाल बच्चा परिजनों को सौंप दिया गया है। हालांकि, बच्चे की दीर्घकालिक देखभाल और अभिभावकत्व से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान बच्चे के हित और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होना जरूरी है।

