रोहतक में नगर निगम के दर्जा चार कर्मचारी सड़क पर उतर आए हैं। वह नौकरी से हटाए कर्मचारियों को वापस रखने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी शहर में प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद प्रशासन को मांग पत्र सौंपा जाएगा। कर्मचारियों ने प्रशासन को भूख हड़ताल की भी चेतावनी दी है।

वहीं अगर कर्मचारी हड़ताल पर गए तो इसका असर शहरियों पर पड़ेगा। इससे शहर की सफाई व्यवस्था ठप हो सकती है।
रोहतक में करीब 225 कर्मचारी पिछले 4-5 वर्ष से ठेकेदार के माध्यम से कार्यरत है। लेकिन नगर निगम रोहतक तथा ठेकेदार का अनुबंध समाप्त होने के कारण ठेकेदार द्वारा सभी कर्मचारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस दे दिया। जिस कारण सभी कर्मचारियों का रोजगार समाप्त हो गया और सड़कों पर आ गए। इसलिए परिवार का पालन पोषण करना भी मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने मांग की कि जो कर्मचारी ठेके पर लगे थे, उनको आगे जिस कंपनी को ठेका दिया जाए, उसमें प्राथमिकता से रखा जाए।
नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले नगर निगम के कर्मचारी संघर्ष कर रहे हैं। वे अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों को भी ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई। कर्मचारियों ने चेतावनी दे रखी है कि अगर मांग नहीं मानी गई तो 19-20 अक्टूबर को दो दिवसीय भूख हड़ताल करेंगे। इसके बाद भी समाधान नहीं होगा तो 21 अक्टूबर से कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।
कर्मचारियों की अन्य मांगें
- कर्मचारियों ने मांग की कि पुरानी पेंशन बहाल की जाए
- कौशल रोजगार निगम भंग करके कच्चे कर्मियों को पक्का किया जाए
- सभी भत्तों सहित समान काम-समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
- अग्निशमन विभाग को पुन: शहरी स्थानीय निकाय विभाग में समायोजित करें और 1366 फायरमैन एवं ड्राइवरों को 2268 फायर ऑपरेटर कम ड्राइवर के पदों पर समायोजित करें।
- आउटसोर्स पार्ट 1 व वर्क आउटसोर्सिंग डोर-टू-डोर तथा ओ एंड एम का ठेका प्रथा बंद कर विभाग के पे रोल पर लें, क्षेत्रफल व आबादी के अनुपात में नए पद सृजित कर नियमित भर्ती की जाए।
- निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाने, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियमित भर्ती करें, 4 हजार रुपए मासिक जोखिम भत्ता व कोरोना में मारे गए कर्मचारियों को 50 लाख रुपए आर्थिक सहायता तथा आश्रितों को पक्की नौकरी दी जाए,
