केंद्र सरकार ने उत्तर भारत में सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए बड़े कदम के तहत एनई-5 एक्सप्रेसवे को अधिसूचित कर दिया है। यह एक हाई-स्पीड दिल्ली-कटरा कॉरिडोर होगा, जो दिल्ली को हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से जोड़ेगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत अधिसूचना जारी कर इस परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल कर लिया है। इसके बाद अब भूमि अधिग्रहण, रूट तय करने और अन्य विकास कार्यों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली में रानी खेड़ा गांव के पास एनएच-344एम से शुरू होगा और जसौर खेरी गांव के पास कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इसके बाद यह हरियाणा और पंजाब के कई शहरों से गुजरते हुए जम्मू-कश्मीर के कटरा तक पहुंचेगा।
हरियाणा में प्रस्तावित मार्ग खरखौदा, गोहाना, बुटाना, कलायत और बारटा से होकर निकलेगा। वहीं पंजाब में यह गुलजापुर, पाट्रान, भवानीगढ़, धूरी, मलेरकोटला, अहमदगढ़, मुल्लांपुर दाखा, नूरमहल, करतारपुर और गुरदासपुर बाईपास जैसे इलाकों से होकर गुजरेगा। आखिर में यह कटरा के पास एनएच-144 से जुड़ेगा।
केंद्र सरकार का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने से दिल्ली से कटरा तक यात्रा तेज और आसान होगी। इससे माल ढुलाई, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। खासतौर पर माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क सुविधा मिल सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना उत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक कॉरिडोर साबित हो सकती है। इससे छोटे शहरों में निवेश बढ़ने, लॉजिस्टिक्स पार्क, होटल और सड़क किनारे अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकसित होने की संभावना है। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
दिल्ली-कटरा एनई-5 एक्सप्रेसवे बनने के बाद हरियाणा से जम्मू-कटरा की यात्रा में काफी समय कम होने की उम्मीद है। हालांकि अभी सरकार ने आधिकारिक ट्रैवल टाइम जारी नहीं किया है, लेकिन प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि यात्रा समय में 4 से 6 घंटे तक की कमी आ सकती है।
अभी हरियाणा के ज्यादातर हिस्सों से कटरा पहुंचने में सड़क मार्ग से करीब 10 से 14 घंटे तक लग जाते हैं। माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं और ट्रांसपोर्ट कारोबार को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की संभावना है।

