अब तक आपने तोते को इंसानों की नकल करते सुना होगा, लेकिन क्या कभी किसी कौए को बोलते हुए देखा है? यह सुनकर शायद आपको यकीन न हो, लेकिन महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक छोटे से गांव में ऐसा ही अनोखा नजारा देखने को मिला. वहां एक कौआ इंसानों की तरह बोल रहा है और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो गया है.

अनोखी कहानी पालघर जिले के वाडा तालुका के गारगांव की है. यहां एक आदिवासी परिवार आम के बाग की देखभाल करता है. तीन साल पहले, जोरदार आंधी-तूफान में नीलगिरी के पेड़ की एक शाखा टूटकर गिर गई और उसके साथ एक छोटे कौए का घोंसला भी नीचे आ गिरा. उस घोंसले में एक नन्हा सा घायल कौआ था, जिसे मंगल्या मुकणे के बच्चों प्रतीक्षा (जिसे प्यार से परतु बुलाया जाता है) और सरगम ने घर ले जाकर संभाल लिया.

बच्चों ने उस घायल कौए की देखभाल की, उसका इलाज किया और धीरे-धीरे वह परिवार का हिस्सा बन गया. प्यार से उसे ‘काल्या’ नाम दिया गया. मंगल्या मुकणे के परिवार की आदिवासी भाषा और बोलने का तरीका थोड़ा अलग है. घर के बच्चे अपने पिता को ‘काका’, मां को ‘आई’, और दादी को ‘आए’ कहकर बुलाते हैं.

मिली जानकारी के अनुसार तीन महीने पहले इस परिवार ने एक अनोखी चीज़ नोटिस की—उनका ‘काल्या’ सिर्फ कांव-कांव नहीं करता था, बल्कि घरवालों की नकल करने लगा था! वह ‘परतु’, ‘सरगम’, ‘काका’, ‘आई’, ‘काकू’ जैसे शब्द बोलने लगा. इतना ही नहीं, अगर घर में कोई खांसता, तो वह भी खांसने की नकल करता. जब बच्चे शोर मचाते, तो वह उन्हें ‘चुप-चुप’ कहकर डांटने भी लगा!

प्रतीक्षा ने इस अनोखे कौए का वीडियो बनाया और अपनी एक दोस्त को भेज दिया. दोस्त ने यह वीडियो व्हाट्सऐप ग्रुप्स और फेसबुक पर डाल दिया. देखते ही देखते ‘बोलने वाला काला कौआ’ इंटरनेट पर वायरल हो गया. अब यह अनोखा पक्षी चर्चा का विषय बन चुका है और आसपास के गांवों के लोग उसे देखने के लिए आ रहे हैं.

गारगांव के इस अनोखे ‘बोलने वाले’ कौए ने पूरे सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है. लोग अब इसे देखने के लिए खासतौर पर गांव आ रहे हैं. यह कहानी सिर्फ एक अनोखे पक्षी की नहीं, बल्कि उस प्यार और देखभाल की भी है, जिसने एक घायल पक्षी को नया जीवन और एक नई पहचान दे दी.

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