चंडीगढ़। हरियाणा में निजी कोचिंग सेंटर चलाने वालों के लिए अब नियमों की अनदेखी करना मुश्किल होगा। प्रदेश सरकार ने निजी कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित और व्यवस्थित करने के लिए बनाए गए नियमों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद कोचिंग संस्थानों के रजिस्ट्रेशन से लेकर छात्रों की सुरक्षा, सुविधाओं और जवाबदेही तक कई पहलुओं को कानूनी दायरे में लाने का रास्ता साफ हो गया है।

सबसे अहम प्रावधान यह है कि निजी कोचिंग संस्थानों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। हरियाणा विधानसभा से पारित कानून के मुताबिक कोई भी व्यक्ति या संस्था निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित जिला प्राधिकरण से रजिस्ट्रेशन लिए बिना निजी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं कर सकेगी। अलग-अलग शाखाएं होने की स्थिति में प्रत्येक शाखा के लिए अलग रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है।

पहली गलती ₹25 हजार, दूसरी पर ₹1 लाख जुर्माना
नियमों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ आर्थिक दंड का भी कड़ा प्रावधान है। कानून के मुताबिक पहली बार उल्लंघन करने पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बाद दोबारा उल्लंघन होने पर जुर्माना बढ़कर ₹1 लाख हो जाएगा। उल्लंघन जारी रहने की स्थिति में संस्थान का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है।
यानी अब केवल रजिस्ट्रेशन करा लेना ही पर्याप्त नहीं होगा। संस्थान को संचालन के दौरान भी निर्धारित नियमों और मानकों का पालन करना होगा।

छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं पर फोकस
हाल ही में मंजूर नियमों में छात्रों की सुरक्षा और उनके लिए उपलब्ध सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी की योग्यता, फायर सेफ्टी, स्वच्छता और कक्षाओं में भीड़ जैसे पहलुओं के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं।

इसका सीधा मतलब है कि छोटी जगह में क्षमता से ज्यादा विद्यार्थियों को बैठाकर कोचिंग चलाने जैसे मामलों पर भी प्रशासन की नजर रहेगी।

काउंसलर रखना भी होगा जरूरी
कानून में छात्रों के मानसिक तनाव को भी गंभीरता से लिया गया है। निजी कोचिंग संस्थान को छात्रों की मानसिक सेहत और तनाव से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए कम से कम एक फुल-टाइम काउंसलर रखने का प्रावधान किया गया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर पढ़ाई और परिणाम का दबाव देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भ्रामक विज्ञापन भी नहीं कर सकेंगे कोचिंग सेंटर
अक्सर कोचिंग संस्थानों द्वारा रिजल्ट, चयन और सफलता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। नए कानूनी ढांचे में ऐसे भ्रामक विज्ञापनों और गलत जानकारी पर भी रोक है। कोई निजी कोचिंग संस्थान अपनी कोचिंग सेवाओं से संबंधित भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकता।
इससे छात्रों और अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए गलत या बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले दावों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है।

जिला स्तर पर होगी निगरानी
कोचिंग संस्थानों के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन के लिए जिला स्तर पर व्यवस्था बनाई गई है। इससे स्थानीय प्रशासन के पास यह जानकारी उपलब्ध हो सकेगी कि जिले में कितने संस्थान चल रहे हैं और कौन से संस्थान निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं।

फरीदाबाद में पहले सामने आई एक रिपोर्ट में 400 से ज्यादा कोचिंग सेंटरों के सुरक्षा संबंधी अनुपालन पर सवाल उठे थे। उस समय कानून के क्रियान्वयन के लिए जरूरी नियमों का इंतजार था। अब कैबिनेट द्वारा नियम मंजूर किए जाने से इसे जमीन पर लागू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

अभिभावकों और छात्रों के लिए क्यों अहम है फैसला?
हरियाणा में प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई के लिए बड़ी संख्या में छात्र निजी कोचिंग संस्थानों का सहारा लेते हैं। ऐसे में सरकार का उद्देश्य केवल संस्थानों का रजिस्ट्रेशन कराना नहीं, बल्कि छात्रों को सुरक्षित वातावरण, उचित सुविधाएं और जवाबदेह व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है।

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