नारनौल। दिवाली की छुट्टी पर परिवार के बीच लौट रहे BSF इंस्पेक्टर विनोद कुमार (59) का रास्ते में निधन हो गया। वे जैसलमेर से ट्रेन में सवार होकर अपने पैतृक गांव भूषण कलां आ रहे थे। नारनौल पहुंचने से पहले अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे ट्रेन में बेहोश हो गए। बाद में रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी रिटायरमेंट में महज दो महीने बाकी थे।
विनोद कुमार के निधन की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। सोमवार शाम को उनके पैतृक गांव भूषण कलां में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। BSF के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
1987 में BSF में भर्ती हुए थे विनोद
विनोद कुमार वर्ष 1987 में BSF में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। करीब चार दशक तक उन्होंने देश की सुरक्षा में सेवाएं दीं। वर्तमान में उनकी तैनाती राजस्थान के जैसलमेर में BSF की 35वीं बटालियन में थी। उनकी सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर 2026 को होनी थी।
2 नवंबर को वे जैसलमेर से ट्रेन के जरिए अपने गांव भूषण कलां के लिए रवाना हुए थे। उन्हें नारनौल रेलवे स्टेशन पर उतरना था, लेकिन रास्ते में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए।
फोन नहीं उठाया तो परिवार ने GRP को दी सूचना
विनोद कुमार से संपर्क नहीं होने पर परिजनों ने उन्हें फोन किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। काफी देर तक बात नहीं होने पर परिवार चिंतित हो गया। इसके बाद परिजनों ने रेलवे पुलिस (GRP) को सूचना दी।
तलाश और जांच के दौरान रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर उनके बारे में जानकारी मिली। वहां डॉक्टरों को बुलाया गया, जिन्होंने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
BSF जवानों ने दी अंतिम सलामी
विनोद कुमार का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव भूषण कलां लाया गया। सोमवार शाम BSF की 95वीं बटालियन, भोंडसी से इंस्पेक्टर भागचंद के नेतृत्व में जवानों की टीम गांव पहुंची। जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी। इसके बाद गांव के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
परिवार में दो बेटियां और एक बेटा
विनोद कुमार के परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। उनका 28 वर्षीय बेटा संजय कुमार अविवाहित है। उसने पावर इंजीनियरिंग में बीटेक किया है और फिलहाल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।
परिवार के अनुसार, विनोद कुमार को किसी तरह की बीमारी नहीं थी और उन्होंने कभी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का जिक्र भी नहीं किया था। बेटे संजय ने ही उनके जैसलमेर से नारनौल आने के लिए ट्रेन की टिकट बुक की थी। ट्रेन में बैठने के दौरान परिवार से उनकी आखिरी बार बात हुई थी।
