नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से गठित कमेटी की सिफारिशों के आधार पर अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है। इन स्थानों पर धरना-प्रदर्शन की प्रक्रिया और नियमों को लेकर संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी।
CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी। दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद संगठन ने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शन की तारीख नहीं दी गई तो आंदोलन किया जाएगा।
CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को प्रदर्शन की अनुमति मांगने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे। संगठन ने पुलिस को पत्र सौंपकर प्रदर्शन की तारीख तय करने का विकल्प भी दिया।
संसद के नजदीक प्रदर्शन पहुंचने के बाद बदला फैसला?
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की गई है। हालांकि, संसद से करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के कारण यहां होने वाले प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं चर्चा में हैं।
इससे पहले जून-जुलाई में NEET पेपर लीक के मुद्दे पर CJP ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से 25 जुलाई तक प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन 36 दिनों तक चला था। इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। 25 जुलाई को प्रदर्शन समाप्त हो गया था।
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के संसद के नजदीक पहुंचने की भी चर्चा हुई थी। वहीं, रामलीला मैदान संसद से लगभग 3-4 किलोमीटर दूर है, जबकि बुराड़ी और CBD ग्राउंड दिल्ली के अन्य हिस्सों में स्थित हैं।
हिरासत को लेकर CJP फाउंडर ने उठाए सवाल
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उनकी हिरासत का वीडियो एडिट करके जारी किया। उन्होंने पूरे वीडियो को सार्वजनिक करने की मांग की। दीपके का दावा है कि हिरासत के दौरान उन्होंने अपनी दादी की मौत की खबर मिलने के बाद चचेरे भाई से बात करने के लिए फोन मांगा, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी।
दीपके के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें पूरे दिन उनके माता-पिता और वकीलों से संपर्क नहीं करने दिया और हिरासत में रखे जाने की जगह की जानकारी भी परिवार को नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से उन्हें और उनके परिवार को मानसिक परेशानी हुई। ये आरोप CJP संस्थापक की ओर से लगाए गए हैं।
दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। वे जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे थे। रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद तीनों को रिहा कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त भी रखी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने भी वैकल्पिक स्थल तलाशने की बात कही
9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने भी जंतर-मंतर के विकल्प के तौर पर ऐसी बड़ी जगह तलाशने की बात कही थी, जहां पानी, शौचालय और मेडिकल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। इसी बीच, CJP और विपक्षी दल SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं।
इसी मुद्दे पर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन प्रस्तावित था, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी। शनिवार और रविवार को प्रदर्शनकारियों को वहां पहुंचने से रोका गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं के दौरान CJP, विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
फिलहाल, जंतर-मंतर के स्थान पर तीन वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल निर्धारित किए गए हैं। वहीं, CJP ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
