सिंघु बॉर्डर पर तरनतारन के गांव चीमा के रहने वाले लखबीर सिंह की हत्या का विवाद गरमाता जा रहा है। इस घटना के 15 घंटे बाद शुक्रवार शाम को निहंग सरबजीत सिंह ने सरेंडर किया था। अब एक और निहंग नारायण सिंह ने सरेंडर कर दिया है। दिल्ली के निहंग नारायण सिंह को अमृतसर के देवीदास पुरा गुरुद्वारे के बाहर से हिरासत में लिया गया। नारायण सिंह के अमृतसर पहुंचने की खबर मिलते ही पुलिस ने इलाके को घेर लिया था। और गुरुद्वारे से बाहर निकलते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

निहंग नारायण सिंह का कहना है कि लखबीर सिंह ने उनके गुरु का अपमान किया था, इसलिए जो उन्होंने किया ठीक किया। अगर सरबजीत सिंह कसूरवार है तो वह भी कसूरवार हैं। उन्होंने भी इस घटना में सरबजीत सिंह का उतना ही सहयोग दिया है। 2014 से गुरुओं का अपमान हो रहा है। गुरु ग्रंथ साहिब की कितनी घटनाएं सामने आईं, लेकिन पुलिस ने कोई सहयोग नहीं दिया। एक भी आरोपी पर कार्रवाई नहीं की गई। इस घटना में आरोपी को सरेआम पकड़ लिया गया और उस समय जो ठीक लगा, निहंग जत्थेबंदियों ने किया है। ऐसे में वह भी उतने ही कसूरवार हैं, जितना सरबजीत।

निहंग नारायण सिंह समर्पण करने के लिए सुबह ही सिंघु बॉर्डर से निकल चुके थे। निहंग नारायण सिंह का कहना था कि संगत उन्हें अमृतसर में सरेंडर करने के लिए कह रही थी। जिसके बाद उन्होंने अमृतसर आकर सरेंडर करने का फैसला किया। जानकारी के अनुसार वह पुलिस से छिपते हुए देवी दासपुरा पहुंच गए थे।

दोपहर पुलिस ने गांव को घेर लिया। पुलिस की हरकत को देख उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अरदास के बाद खुद ही समर्पण कर देंगे। अरदास के बाद वह गुरुद्वारा साहिब से बाहर आ गए और समर्पण कर दिया। वहीं एसएसपी रूरल राकेश कौशल का कहना है कि फिलहाल निहंग नारायण सिंह उनकी कस्टडी में हैं। हरियाणा पुलिस के अमृतसर पहुंचते ही उन्हें सौंप दिया जाएगा।

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