केंद्र सरकार के 3 कृषि कानून वापस लेने के बाद आंदोलन खत्म करने पया न करने पर अभी तक किसान संगठन एकमत नहीं कर पाए हैं। पंजाब के कुछ किसान संगठन आंदोलन खत्म करने को लगभग सहमत हैं तथा वह जीत का जश्न भी मना रहे हैं। हालांकि राकेश टिकैत और गुरनाम चढ़ूनी आंदोलन जारी रखने पर अड़े हुए हैं। इसे देखते हुए पंजाब के 32 किसान संगठनों ने मंगलवार दोपहर फिर सिंघु बॉर्डर पर मीटिंग बुला ली है। जिसमें किसान आंदोलन खत्म कर घर वापसी को लेकर तथा अगर कुछ किसान नेता घर वापसी पर सहमत नहीं है तो पंजाब के किसान संगठनों को क्या कदम उठाना चाहिए पर चर्चा होगी। हालांकि पंजाब के किसान नेता चाहते हैं कि सर्वसम्मति से ही इसका फैसला हो। ताकि किसानों की एकता को लेकर कोई गलत संदेश न जाए। हालांकि सोमवार को पंजाब के किसान संगठनों ने मीटिंग कर घर वापसी पर सहमति दी थी। इससे पहले उन्होंने बाकी मांगों को लेकर केंद्र सरकार को एक दिन का अल्टीमेटम भी दिया था।

पंजाब के किसान नेताओं का कहना है कि उनकी मुख्य मांग 3 कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने की थी। इसे केंद्र ने एक ही दिन में लोकसभा और राज्यसभा से पास करवा दिया। पराली और बिजली एक्ट से किसानों को बाहर निकाल दिया। अब वह चाहते हैं कि MSP पर सरकार कमेटी बनाकर किसानों को शामिल करें। इसके साथ आंदोलन में मरे किसानों के परिवारों को मुआवजा और राज्य सरकारों को केस रद्द करने को कहे। इसको लेकर केंद्र की सहमति नजर आ रही है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि किसान नेता राकेश टिकैत और गुरनाम चढ़ूनी केंद्र सरकार से MSP गारंटी कानून की मांग कर रहे हैं। खास बात यह है कि पंजाब के किसान आंदोलन खत्म करने को लेकर जहां संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के फैसले को सुप्रीम कह रहे हैं। वहीं, टिकैत और चढ़ूनी सीधे कह रहे हैं कि आंदोलन खत्म नहीं होगा। कुछ दिन पहले टिकैत ने अमृतसर आकर यह भी कहा कि अगर कोई किसानों को पूछे कि कृषि कानून वापसी के बाद भी आंदोलन खत्म क्यों नहीं हुआ तो वह मौन धारण कर लें।

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