रोहतक में ग्रीन बेल्ट की करीब 200 फीट चौड़ी जमीन पर कब्जा कर 8 अवैध रास्ते बना दिए गए। इस मामले ने शहर में हरित क्षेत्रों की सुरक्षा और सरकारी जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समाचार रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन बेल्ट के एक हिस्से में अवैध रास्ते बनाए गए हैं। इससे हरियाली प्रभावित होने के साथ-साथ सरकारी जमीन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक नहीं हटा अतिक्रमण
रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2021 में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त ने ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण की शिकायतों के संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद कुछ स्थानों पर कार्रवाई हुई, लेकिन कथित तौर पर कई अवैध रास्ते पूरी तरह नहीं हटाए जा सके।
मामले में कई बार शिकायतें किए जाने और अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बावजूद समस्या बने रहने की बात सामने आई है।
ग्रीन बेल्ट पर रास्ते और पार्किंग बनाने का आरोप
ग्रीन बेल्ट का उद्देश्य शहर में हरियाली बनाए रखना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है। लेकिन यहां रास्ते और पार्किंग जैसी गतिविधियों के लिए जमीन का इस्तेमाल किए जाने से हरित क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि जमीन पर अतिक्रमण हुआ है, तो उसे समय रहते हटाकर ग्रीन बेल्ट को उसके मूल स्वरूप में क्यों नहीं लौटाया गया।
एचएसवीपी के नियम क्या कहते हैं?
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के नियमों के तहत निर्धारित भूमि का उपयोग उसके स्वीकृत उद्देश्य के अनुसार किया जाना चाहिए। ग्रीन बेल्ट की जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण या रास्ते के इस्तेमाल की वैधता संबंधित स्वीकृत योजना और अनुमति के आधार पर तय होगी।
ऐसे में पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जमीन पर बनाए गए रास्ते अधिकृत हैं या नियमों के विरुद्ध।
अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी नजरें
ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण का यह मामला शहर की पर्यावरणीय व्यवस्था और सरकारी जमीन की सुरक्षा से जुड़ा है। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग जमीन की पैमाइश कर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं और यदि अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो उसे हटाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

