हरियाणा की नायब सैनी सरकार को समर्थन दे रहे बहादुरगढ़ के निर्दलीय विधायक राजेश जून और भाजपा नेताओं के बीच सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। बहादुरगढ़ से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी दिनेश कौशिक ने मीडिया के सामने राजेश जून पर संगठन को कमजोर करने और पार्टी को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए। वहीं राजेश जून ने भी पलटवार करते हुए दिनेश कौशिक को तानाशाही प्रवृत्ति का बताया।
दिनेश कौशिक ने कहा, “मैं किसी से डरने वाला नहीं हूं। बेशक लाइव चला लो। पूरी साजिश का पर्दाफाश होगा। जो लोग भाजपा को समर्थन देकर संगठन को कमजोर कर रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।” इस दौरान उनके साथ नगर परिषद चेयरपर्सन सरोज राठी समेत कई भाजपा नेता मौजूद रहे।
कौशिक ने आरोप लगाया कि राजेश जून भाजपा कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रहे हैं, नगर परिषद पर दबाव बना रहे हैं और विकास कार्यों का अकेले श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आयुष्मान योजना और ईएसआई से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ी तथा अस्पताल का रिकॉर्ड जलाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए, हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि विधायक पर छापे की तैयारी थी और पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री व भाजपा नेतृत्व को दी जाएगी।
उधर, विधायक राजेश जून ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “दिनेश कौशिक ने तो अपने भाई तक को नहीं छोड़ा। चुनाव के समय उनके भाई और पूर्व विधायक नरेश कौशिक ने ही उन्हें तानाशाह बताया था।”
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष विकास वाल्मीकि ने कहा कि दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत कराई जाएगी और मामला जल्द सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
विवाद की बड़ी वजहें
2024 विधानसभा चुनाव में निर्दलीय राजेश जून ने भाजपा प्रत्याशी दिनेश कौशिक को करीब 41 हजार वोटों से हराया था।
चुनाव जीतने के बाद राजेश जून ने नायब सैनी सरकार को बिना शर्त समर्थन दिया।
मुख्यमंत्री नायब सैनी भी सार्वजनिक मंच से बहादुरगढ़ में “हमारे दो विधायक” होने की बात कह चुके हैं।
नगर परिषद के विकास कार्यों, उद्घाटनों और डीएमसी विवाद को लेकर दोनों पक्ष लगातार आमने-सामने हैं।
इस घटनाक्रम ने बहादुरगढ़ भाजपा की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। अब सभी की नजर भाजपा नेतृत्व पर है कि वह इस विवाद को किस तरह सुलझाता है।
