हरियाणा में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 21,752 बच्चों को मिला प्रवेश, 31 हजार आवेदन; 60,400 सीटें उपलब्ध
हरियाणा में आरटीई अधिनियम के तहत प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले 21,750 से अधिक बच्चों को प्रदेश के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में सीटें आवंटित की गई हैं। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिया है कि वे पात्र छात्रों को 10 दिनों के भीतर प्रवेश सुनिश्चित करें।
जानकारी के अनुसार, स्कूलों द्वारा 60,400 से अधिक सीटें उपलब्ध कराई गई थीं, जिनके लिए 31 हजार से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए। सत्यापन प्रक्रिया के बाद 21,752 बच्चों को प्रवेश आवंटित किया गया।
कक्षा-वार आवंटन में नर्सरी की 10,880 सीटें, एलकेजी की 1,280 से अधिक सीटें, यूकेजी की 1,900 से अधिक सीटें और कक्षा 1 की 7,680 सीटें शामिल हैं।
निदेशालय ने स्कूलों को आरटीई के माध्यम से आवंटित छात्रों के प्रवेश को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया है। स्कूलों को प्रवेश प्रक्रिया में देरी नहीं करनी चाहिए और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग श्रेणी के पात्र छात्रों का प्रवेश पूरा करना चाहिए।
विद्यालय स्तरीय समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन पहले से तय आधारों पर करें, जिनमें यह शर्त भी शामिल है कि आवेदक हरियाणा का निवासी हो और उसके पास वैध निवास प्रमाण पत्र हो। इसके अलावा 0-1 किमी या 1-3 किमी के दायरे में आना चाहिए, जैसा कि पड़ोस के मानदंडों के तहत आवंटन में निर्धारित है।
हाल ही में, निदेशालय ने पड़ोस के मानदंडों के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 1 और पूर्व-प्राथमिक तथा प्राथमिक कक्षाओं में आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर विद्यालय से 0 से 1 किलोमीटर की दूरी के भीतर रहने वाले पात्र बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है। यदि कोई विद्यालय 1 से 3 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र बच्चों को ‘स्वैच्छिक रूप से’ प्रवेश देता है, तो विभाग नियमों के अनुसार प्रतिपूर्ति करेगा।
निदेशालय के अनुसार, प्रवेश अस्थायी होगा और डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद ही इसकी पुष्टि की जाएगी। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि यदि प्रवेश अस्वीकृत होता है, तो विद्यालय को विभाग के पोर्टल पर इसका स्पष्ट कारण बताना होगा।
सभी विद्यालय यह सुनिश्चित करेंगे कि स्वीकृत या अस्वीकृत सभी प्रवेशों की जानकारी पोर्टल पर दी जाए।
सभी अस्वीकृत मामलों का विवरण समीक्षा के लिए ब्लॉक-स्तरीय निगरानी समिति को प्रस्तुत किया जाएगा। समिति लागू नियमों के अनुसार शिकायतों की समीक्षा और समाधान करेगी। यदि किसी शिकायत का समाधान पांच दिनों के भीतर नहीं होता है, तो उसे प्रथम अपीलीय समिति और फिर अंतिम अपीलीय प्राधिकारी को भेजा जाएगा।
