रोहतक में एचआईवी और एड्स (रोकथाम एंव नियंत्रण) अधिनियम 2017 के संबध में स्थानीय जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सभागार में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण रोहतक के पैनल के वरिष्ठ अधिवक्ता राजबीर कश्यप ने बताया कि दक्षिण एशिया का भारत एक ऐसा पहला देश है, जिसने 10 सितंबर 2018 को उपरोक्त अधिनियम लागू किया।

उन्होंने बताया कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य एचआईवी संक्रमित और इससे प्रभावित लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है और एचआईवी से संबधित भेदभाव, कानूनी दायित्व को शामिल करके वर्तमान कार्यक्रम को मजबूत बनाना, शिकायतों और शिकायत निवारण के लिए औपचारिक व्यवस्था करना, एड्स का निवारण और नियंत्रण तथा एचआईवी एड्स के शिकार लोगों के साथ भेदभाव को निषेध करना है। इस कानून के प्रावधानों के तहत एचआईवी संक्रमित लोगों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले लोगों को कम से कम तीन माह की सजा व एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है तथा जेल की अवधी को दो साल तक बढाया जा सकता है। जिस प्रकार भारतीय संविधान में भारतीय नागरिकों को अनुच्छेद 12से 35 तक जो मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं ठीक उसी तरह एड्स मामलो में तीन मुख्य अधिकार एचआईवी परीक्षण से पहले सूचना दिये जाने का अधिकार, गोपनीयता का अधिकार तथा भेदभाव के खिलाफ अधिकार प्रदान किये गये हैं। एचआईवी संक्रमित के साथ रोजगार, शिक्षण संस्थान में और उन्हें स्वास्थ्य सुविधा देने में भेदभाव करने को प्रतिबंधित किया गया है।

इस अवसर पर एचआईवी के संबध में बेबाक काउंसलर डॉ श्रीमती आशा ने बताया कि आज भारत मे लगभग 23 लाख एचआईवी संक्रमित है, जिनमें से अकेले हरियाणा में 40 हजार लोग एचआईवी से संक्रमित है। इस अवसर पर डॉ आशा, संदीप कुमार, सतनाम सिह लूथरा, अजीत सिंह नांदल, सतबीर सिंह मेहरा, पीएलवी अतुल कुमार व विभिन्न पीएचसी एंव सीएचसी से आये स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे।

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