भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली में जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना सोमवार को 9वें दिन भी जारी है। इस बीच आरोपी BJP सांसद बृजभूषण ने कहा है कि कुछ रेसलर्स की वजह से 4 महीन से खेल की सारी गतिविधियां ठप पड़ी हैं।

बृजभूषण ने कहा- मेरी धरने पर बैठे खिलाड़ियों से अपील है कि बेशक, आप मुझे फांसी दे दीजिए, लेकिन खेल को मत रोकिए। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ मत करिए। कोई भी स्टेट नेशनल कैंप लगाए, उसे मत रोकिए। जिस बच्चे की उम्र आज 14 साल 9 माह है, वह 3 माह बाद अपने जीवन में एक प्रतियोगिता को खेलने का अवसर खो देगा।

इस बात की गंभीरता को समझिए। बृजभूषण ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री कहेंगे तो वह इस्तीफा दे देंगे। इस धरने के पीछे कई 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं और इसमें दीपेंद्र हुड्डा के साथ-साथ एक बड़ा उद्योगपति भी शामिल है।

सोमवार दोपहर को पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू पहलवानों के समर्थन में उनके धरने पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह संजीदगी वाला मामला है। इसलिए न ही कोई ताली बजाए और न नारे लगाए। मैं अपने खिलाड़ियों के लिए आया हूं। ये रील हीरो नहीं, रियल हीरो है। इसलिए इनको छोटे दायरे में मत रखना।

उन्होंने कहा कि किसी भी केस की बुनियाद एफआईआर होती है। अभी तक वह डॉक्यूमेंट सार्वजनिक नहीं हुए। सवाल ये है कि 10 दिन क्यों लगे। अगर ज्यादा देर ये न्याय टला तो सिद्धू जान की बाजी लगाएगा। कार्रवाई दोषी पर ही नहीं, उस अफसर पर भी करिए, जिसने इसमें दर्ज नहीं किया था।

सिद्धू ने कहा कि दोषी एक उच्च पद है। वह किसी का भी करियर बिगाड़ सकता है, किसी को भी धमका सकता है। तो कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि कैसे फेयर जांच होगी। अब जो एफआईआर हुई है वह पॉक्सो एक्ट में हुई है, जोकि जमानती नहीं है। मेरा सवाल है कि गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।

सबसे अहम मुद्दा है क्या कानून ऊंचे लोगो के लिए दोहरे मापदंड रखेगा। रिजाइन होना चाहिए, पूछताछ होनी चाहिए। सबसे बड़ी बात अरेस्ट कर के पूछताछ होनी चाहिए। दोहरे मापदंड क्यों है, बड़े लोगों के साथ। सही और गलत की लड़ाई में न्यूट्रल नहीं रह सकते। आपको पक्ष लेना पड़ेगा।

अरे साहब, शेरिनियों की दहाड़ हैं इनकी। धन्य हैं हमारी संस्कृति कितने ही बब्बर शेर हो जाए, सवारियां तो दुर्गा ही करती हैं। ये लड़ाई इनकी नहीं है, ये घर-घर की लड़ाई है। ये किसी के साथ भी हो सकता है। इसलिए सब मिलकर लड़ाई लड़े।

धरने पर बैठे पहलवान बजरंग पूनिया ने कहा कि न्यायपालिका पर मुझे पूरा भरोसा है। यह लड़ाई न्याय की है। जब तक हमें न्याय नहीं मिलेगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह लड़ाई कितनी भी लंबी चले हम लड़ने को तैयार हैं।

खाप पंचायत, किसान संगठन-मजदूर संगठन, पूरा भारत इंसाफ दिलाने के लिए घर से बाहर निकलकर साथ दे रहा है। कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकीं विनेश फोगाट ने कहा कि देश के करोड़ों लोग हमारे समर्थन में बैठे हैं, यह हमारे मन की बात सुन रहे हैं। यही हमारी ताकत है।

धरना स्थल पर रविवार को रॉबर्ट वाड्रा पहुंचे। उन्होंने कहा कि मैं सभी एथलीट के समर्थन में यहां आया हूं। पूरा परिवार इनके समर्थन में है। जब तक इनको इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक हम सब इन्हें जरूर सहायता देंगे।

भारतीय ओलिंपिक समिति की अध्यक्ष पीटी उषा के ताजा बयान कि प्रदर्शन करना अनुशासनहीनता है, पर रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि वे इन खिलाड़ियों की मेहनत को नहीं समझ रहे और ऐसा करने से इनका मनोबल टूटेगा। गौरतलब है कि शनिवार को उनकी पत्नी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी भी जंतर मंतर पहुंची थीं।

हरियाणा की पृष्ठभूमि से निकलकर मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री में जाकर प्रतिभा के बल पर अपना नाम कमाने वाले अभिनेता रणदीप हुड्‌डा ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि खेल और खिलाड़ी राष्ट्र से संबंधित हैं और खेल राजनीति से ऊपर होना चाहिए। उन्हें सुरक्षित महसूस करने की आवश्यकता है, ताकि वे जो कर सकते हैं, वह कर सकें और सभी भारतीयों को गौरवान्वित कर सकें। आशा है कि सत्य की जीत होगी और जल्द से जल्द न्याय मिलेगा।

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