हरियाणा के जींद जिले की सफीदों हांसी ब्रांच नहर के पास डेहा बस्ती से वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और स्थानीय वाइल्ड लाइफ टीम ने गोह हत्थाजोड़ी के दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। तस्करों से छह हत्थाजोड़ी बरामद हुई है।
तस्कर गोह का शिकार कर मांस खा जाते थे और तांत्रिकों को हड्डियां बेच देते थे। तस्करों को आज पर्यावरण अदालत कुरूक्षेत्र में पेश करने ले जाया गया है। वहां से मिले आदेशों के बाद तस्करों पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।तस्करों से बरामद गोह की हत्थाजोड़ी।तस्करों से बरामद गोह की हत्थाजोड़ी।
सफीदों से करते थे गोह का शिकार, टोने-टोटकों में प्रयोग होते हैं हत्थजोड़ेवाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो दिल्ली को सूचना मिली थी कि वन्य प्राणी गोह का तस्करी के उद्देश्य से शिकार किया जा रहा है। गोह को मारकर उसका मांस या तो खा लिया जाता है या फिर बेच दिया जाता है। गोह की हत्थाजोड़ी की तांत्रिकों के पास अच्छी खासी डिमांड है। हत्थाजोड़ी का प्रयोग टोने टोटकों के लिए किया जाता है। सफीदों इलाके में वन्य प्राणी गोह का शिकार कर उसकी हत्थाजोड़ी को बाहर बेचा जाता है।
सोमवार को वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के संदीप तोमर व स्थानीय वाइल्ड लाइफ निरीक्षक मनबीर सिंह ने सफीदों की डेहा बस्ती में दस्तक दी और वहां पर छापेमारी कर दो लोगों को काबू कर लिया। तलाशी लिए जाने पर उनके कब्जे से गोह की छह हत्थाजोड़ी बरामद हुई। आरोपियों की पहचान ओमनाथ तथा तेजबीर के रूप में हुई है।
चार से पांच हजार प्रति जोड़े के हिसाब से थे बेचतेतस्कर तेजबीर शाही दवा खाना के नाम से टेंट लगाकर तंदरूस्ती की दवा बेच रहा था। बताया जाता है कि दोनों व्यक्ति सफीदों इलाके में सक्रिय थे ओर गोह का शिकार कर मांस खा जाते थे और उनकी हत्थाजोड़ी को बाहर बाजार में बेच देते थे। एक हत्थाजोड़ी की कीमत चार से पांच हजार रुपये बताई गई है। वाइल्ड लाइफ विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 के तहत चालान किया है। अधिकारियों के मुताबिक गोह को मारकर उसके अंगों को बेचने की सूचना मिली थी। पिछले दो दिनों से टीम डेहा बस्ती पर नजर रखे हुए थी। जहां से छह गोह के हथजोडे बरामद हुए है।
