रोहतक में खेतों से जलभराव निकालने के लिए प्रशासन ने बड़ी तैयारी की है। तीनों उपमंडलों के गांवों की कृषि भूमि से पानी बाहर निकालने के लिए 395 पंप सेट लगाए गए हैं, जो चौबीसों घंटे चल रहे हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पंप सेट लगाने के भी इंतजाम किए गए हैं। सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि संसाधनों की कमी न हो और जलभराव से निपटने के लिए विशेष योजना तैयार रखें।इसके अलावा प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल भी शुरू किया है। जिले के 147 गांवों के किसान 15 सितंबर तक अपनी खराब हुई फसलों का विवरण पोर्टल पर दर्ज करवा सकेंगे। इससे नुकसान का सही आकलन कर किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज होगी।
डीसी की तरफ से जल निकासी के कार्य को सुचारू ढंग से जारी रखने के लिए जिला के तीनों एसडीएम को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने की 15 दिनों के लिए शक्तियां प्रदान की गई है। एसडीएम आवश्यकतानुसार ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकते हैं। कृषि भूमि से जल निकासी की निगरानी के लिए ग्राम सचिवों एवं पटवारियों को गांवों में तैनात किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा जिला में पशुओं के चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी उपनिदेशक तथा कृषि उपनिदेशक को शामिल किया गया। यह समिति नियमित रूप से जिला में पशुओं के चारे की समीक्षा करेगी तथा किसी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत निर्णय लेकर उसका समाधान करेगी।
डीसी सचिन गुप्ता ने कहा कि जल भराव से संबंधित गांवों में पहुंचकर मौके पर जल निकासी का जायजा लिया। साथ ही संबंधित गांवों के लोगों के जिला प्रशासन का जल निकासी के कार्य में पूर्ण सहयोग करने का आह्वान किया, ताकि जल्दी से जल्दी कृषि भूमि से जल निकासी का कार्य पूर्ण किया जा सके। जिला से गुजरने वाली सभी ड्रेनों के जलस्तर एवं तटबंधों की निगरानी रखने के निर्देश भी दिए।
