हरियाणा के भिवानी जिले के तोशाम एरिया में शनिवार सुबह 8:30 बजे अरावली की पहाड़ियों में खनन के दौरान पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक गया। इसमें 20 से 25 लोग पत्थरों के नीचे दब गए। हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज के अनुसार, शाम साढ़े 4 बजे तक 4 मजदूरों के शव निकाल लिए गए। पहाड़ दरकने से गिरे सैकड़ों टन वजनी पत्थरों के नीचे 4 पोकलेन मशीनें, 2 हॉल मशीनें, 2 ट्रैक्टर और 6 ट्रॉले व डंपर दब गए।

हादसे की सूचना मिलते ही भिवानी जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू करवाया। इसमें एनडीआरएफ की टीमें भी लगी हैं। वहीं पहाड़ का जो हिस्सा गिरा, उसमें तीन बड़े पत्थर हैं, जिन्हें हटाने में दिक्कत आ रही है। यह हादसा गोवर्धन माइन्स की खदान में हुआ। मौके पर 20 से 25 लोग दबे हुए बताए जा रहे हैं। लेकिन हादसे के समय खदान में कुल कितने मजदूर काम कर रहे थे, कंपनी के अधिकारी हादसे को हुए करीब 11 घंटे से बीतने के बावजूद शाम 7 बजे तक इसकी जानकारी नहीं दे पाए हैं।

भिवानी जिले में तोशाम इलाके के खानक और डाडम एरिया में अरावली के पहाड़ों में बड़े पैमाने पर खनन होता है। यहां का पत्थर हरियाणा के अलावा राजस्थान भी जाता है। प्रदूषण की वजह से दो महीने पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने यहां खनन पर रोक लगा दी थी। ये रोक हटने के बाद शुक्रवार को ही दोबारा खनन कार्य शुरू हुआ और शनिवार सुबह 8:30 बजे यह हादसा हो गया।

जिस समय पहाड़ दरका, उस समय यहां आधा दर्जन से ज्यादा पोकलेन मशीनों के जरिये खनन किया जा रहा था। पत्थरों की ढुलाई के लिए कई डंपर और ट्रॉले वहां मौजूद थे। ये सब पहाड़ के बड़े पत्थरों के नीचे आ गए। घटना की सूचना मिलते ही भिवानी जिला और पुलिस प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू कराया। पहाड़ से गिरे पत्थरों को हटाकर लोगों को तलाशा जा रहा है। प्रशासनिक टीमें फिलहाल ड्रिल मशीनों के जरिये पत्थरों को तोड़ने का काम कर रही हैं मगर इसमें बहुत ज्यादा वक्त लग रहा है।

तहसीलदार रविंद्र कुमार ने बताया कि दोपहर 1 बजे तक पत्थरों के नीचे से तीन बॉडी निकाल ली गईं। तीनों मृतक छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मजूदर हैं। एक बॉडी उसके बाद निकाली गई। भिवानी के सिविल सर्जन रघुबीर शांडिल्य ने बताया कि हादसे में काफी संख्या में कैजुअल्टी होने की आशंका है।

खनन कार्यों से जुड़े लोग काफी समय से धरना-प्रदर्शन कर यहां खनन दोबारा शुरू करने की मांग उठा रहे थे। खनन पर लगी रोक हटने और NOC मिलने के बाद दो दिन पहले ही प्रदूषण विभाग ने यहां खनन के लिए बिजली कनेक्शन जारी किया था। NGT ने गुरुवार को ही इस इलाके में खनन दोबारा शुरू करने की अनुमति दी। NGT की अनुमति के बाद शुक्रवार से खनन कार्य शुरू हो गया। दो महीने खनन बंद रहने की वजह से मार्केट में भवन निर्माण सामग्री की किल्लत हो गई थी। आशंका है कि इस किल्लत को जल्दी दूर करने के लिए यहां बड़े स्तर पर ब्लास्ट किए गए और इसी वजह से पहाड़ दरक गया।

इस बीच खानक-डाडम क्रशर एसोसिएशन के चेयरमैन मास्टर सतबीर रतेरा ने दावा किया कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय यहां कोई खनन कार्य नहीं चल रहा था। अरावली का ये खनन क्षेत्र दोनों ओर से फोरेस्ट एरिया से घिरा है। फोरेस्ट एरिया से ही हजारों टन के पत्थर दरककर खनन क्षेत्र की तरफ आया। हालांकि रतेरा इस सवाल का जवाब नहीं दे सके कि अगर खनन कार्य नहीं चल रहा था तो यहां इतनी बड़ी संख्या में मशीनें, ट्रॉले, डंपर और मजदूर क्या कर रहे थे?

वहीं, ग्रामीणों ने भी आरोप लगाया कि प्रशासन हादसे को दबाने में लगा है, मृतकों की संख्या को जानबूझकर छिपाया जा रहा है। बचाव कार्य के लिए NDRF गाजियाबाद से डिप्टी कमांडेंट बेगराज मीणा के नेतृत्व में 42 लोगों की टीम डाडम में पहुंच गई है। पत्थरों के नीचे दबे लोगों की संख्या को लेकर भी कोई स्पष्ट आंकड़ा न तो जिला प्रशासन बता पा रहा है और न ही मौके पर खनन करवा रहा ठेकेदार। खनन विभाग के अधिकारियों के पास भी ये जानकारी नहीं है कि शनिवार सुबह यहां कितने लोग खनन कार्यों में लगे थे। हादसे की जानकारी मिलने के बाद हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल मौके पर पहुंचे। उनके साथ भिवानी के SP अजीत सिंह शेखावत भी रहे।

सुबह 8:30 बजे हुए हादसे के बाद मौके पर पहुंचे भिवानी के SP ने जब ठेकेदार से पूछा तो वह कोई आंकड़ा नहीं बता पाया। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए गाजियाबाद से NDRF की शाम 7:20 बजे, मधुबन से SDRF टीम 6:30 बजे और हिसार से आर्मी की यूनिट 7:00 बजे मौके पर पहुंची। टीमों ने मलबे के नीचे से दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। NDRF मलबे में दबे जिंदा लोगों का पता लगाने वाली थ्रो वोल्ट डिटेक्टर मशीन साथ लाई है। अब रेस्क्यू ऑपरेशन में इसकी मदद ली जाएगी। मिलने वाले घायलों और शवों को तत्काल ले जाने के लिए मौके पर 12 एंबुलेंस भी लगाई गई हैं।

डाडम खनन एरिया में हादसे वाली जगह तक आने के लिए खानक गांव से चार किमी लंबा उबड़-खाबड़ रास्ता है। इसके बाद पहाड़ी की तलहटी में करीब 400 फीट तक नीचे खनन हो रहा है। यहीं पर पहाड़ दरकने के बाद मलबा गिरा हुआ है।

खदान में मौजूद भिवानी जिले के बागनवाला गांव के कुलदीप और काला ने बताया कि वह सुबह से ही घटनास्थल पर मौजूद हैं। प्रशासन के मौके पर पहुंचने से पहले 4 से 5 लोगों को डंपर में डालकर ले जाया गया था। उसके बाद से अब तक 4 और लोगों को निकाला जा चुका है। उनका आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर इस हादसे को छोटा दिखाने की कोशिश कर रहा है। हादसे में घायल और मृतकों की संख्या को छिपाया जा रहा है। राहत और बचाव कार्य में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि रात होने पर लोगों को तीतर-बीतर कर मृतकों की संख्या को छिपा लिया जाए। कुलदीप और काला ने दावा किया कि प्रशासन के आने के बाद भालौठ गांव का धर्मबीर अभी भी मलबे में दबा हुआ है। वहीं बागनवाला निवासी बीरेंद्र और सुरेंद्र के अलावा जींद के मोरखी गांव के संजय की मौत हो चुकी है।

खानक गांव से खदान तक रास्ता उबड़-खाबड़ है। लोगों को खदान तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने 3 जगहों पर नाकेबंदी कर रखी है। प्रशासन का तर्क है कि ज्यादा लोगों के आने से अफरा-तफरी का माहौल बन जाएगा। उससे बचने के लिए ही खदान तक किसी को नहीं पहुंचने दिया जा रहा है।

भिवानी के DC रमनदीप और SP अजीत सिंह शेखावत मौके पर पहुंचे। SP ने जब ठेकेदार से पूछा कि कितने लोग माइन में काम कर रहे थे। इस पर ठेकेदार टालमटोल करने लगा। उसने कहा कि वहां गाड़ी खड़ी कर लोग आ जाते हैं। वहां गाड़ी भरने तक हम किसी की जाने नहीं देते। इसलिए पक्का नहीं कह सकते कि वहां कितने लोग थे। इसके बाद SP ने उसे जमकर लताड़ लगाई। साथ ही अपने सभी मजदूरों को काउंट करने के लिए कहा। अभी तक प्रशासन को भी पता नहीं चला है कि कितने लोग पहाड़ के मलबे में दबे हैं।

प्रशासन की ओर जारी बचाव कार्य सूरज ढलने के कारण प्रभावित हो गया। देर शाम तक सिर्फ 20 फीसदी राहत कार्य ही पूरा हो पाया था। अंधेरा होते देख प्रशासन ने मौके पर लाइट की व्यवस्था करनी शुरू की। इसके लिए जनरेटर भी मंगवाया है।

पहाड़ी से गिरे मलबे को हटाने के लिए बचाव टीम तीन मशीनों के साथ जुटी है। मौके पर गिरे मलबे में तीन कई हजार टन वजनी पत्थर हैं, जो बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बन रहे हैं। बचाव कार्य में लगी मशीनें इन पत्थरों को हटाने में असमर्थ हैं। पत्थरों का वजन और साइज बहुत ही ज्यादा होने के कारण बचाव कार्य में दिक्कत पेश आ रही है। बचाव कार्य में मदद के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (NDRF) की टीम को बुलाया गया है।

चल रहे बचाव कार्य के मद्देनजर डाडम की पहाड़ी के पास 12 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। इनकी मदद से घायलों को अस्पताल तक पहुंचाया जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक टीम के साथ खदान में काम करने वाले लोग ही बचाव कार्य में जुटे हैं। हालांकि पिछले चार घंटे से कोई भी घायल मलबे से नहीं निकाला जा सका है। अभी तक मलबे से सुबह ही चार लोगों को निकाला गया है, इनमें से तीन की मौत हो गई है और घायल हिसार में उपचाराधीन है।

राहत कार्य में तेजी लाने के लिए सांसद धर्मबीर सिंह ने स्थानीय लोगों को नीचे भेजने को कहा। अधिकारियों ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। डीसी रमनदीप ने कहा कि पहाड़ कभी भी खिसक सकता है, इस कारण और लोगों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। बचाव कार्य में बड़े पत्थरों को मशीनों से खिसकाने का प्रयास किया जा रहा है। अभी सिर्फ मशीनों का इस कार्य में प्रयोग किया जा रहा है।

You missed

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!