रोहतक में दो युवकों को पुलिस द्वारा थर्ड डिग्री टॉर्चर देने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक लड़खड़ाते हुए ग्रामीणों के साथ डीसी व एसपी से मिलने लघुसचिवालय पहुंचे। जहां उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में हुई चोरी के आरोप में उनसे झूठी हामी भरवाने के लिए थर्ड डिग्री का टॉर्चर दिया गया।

दोनों पीड़ित युवक विनय व कर्ण गांव चमारिया के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि गांव में चोरी हो गई थी। जिसके घर में चोरी हुई वह अपनी राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर टॉर्चर करवा रहा है। जबकि उनका इस चोरी में कोई हाथ नहीं है।

विनय ने बताया कि 9 जून को वह दिल्ली एयरपोर्ट पर गया था। इसके बाद वह घर आकर सो गया। 10 तारीख को गांव में चोरी हो गई। चोरी के बाद सदर थाना पुलिस ने उसे व उसके साथी कर्ण को उठा लिया। पुलिस ने सख्ती बरती और पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया। अगले दिन फिर से पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ के लिए तीन बार बुलाया और सख्ती से पूछताछ के बाद छोड़ देते।

उन्होंने कहा कि इसके बाद सीआईए में केस चला गया। जिसके कारण सीआईए वालों ने मारपीट की और फिर छोड़ दिया। 13 जून को सुबह करीब 6 बजे सीआईए की टीम फिर पहुंची। वे गाड़ी में उठाकर आईएमटी थाना में ले गए। वहां पर ले जाने के बाद टॉर्चर किया। 10-11 बार पानी में डुबोया। शरीर के ऊपर से मोगरी फेर दी और पैर खोल दिए। साथ ही पांवों फाड़ दिए। बड़े अपराधियों के साथ जो हरकत नहीं होती, ऐसी हरकत उनके साथ की गई है

विनय ने आरोप लगाया कि उनके गांव का ही एक व्यक्ति एमएलए का चुनाव लड़ा था। जिसने अपनी पहुंच का गलत फायदा उठाया और पुलिस से टॉर्चर करवाया है। उसके चाचा के लड़के के घर में चोरी की वारदात हुई थी। उसका मकसद यही था कि चोरी की वारदात को पुलिस कबूल करवा दे। चाहे पैसे व आभूषण मिलें या ना मिले।

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