हरियाणा में कोरोना संक्रमण से 2 और मौत के मामले सामने आए हैं। इस साल अब तक संक्रमण से राज्य में मरने वालों की संख्या 9 पहुंच गई है। इसके साथ 24 घंटे में 1102 नए लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। पॉजिटिविटी दर बढ़कर 12.10 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अब प्रदेश में 4868 एक्टिव केस हो गए हैं। राज्य में पहली बार मृत्यु दर में गिरावट देखने को मिली है। 24 घंटे में 1.01% से गिरकर 1.00 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सूबे में 31 मार्च से वैक्सीनेशन नहीं हो रहा है। फरवरी मिड में मिली खेप के बाद सूबे में कोई नई खेप वैक्सीन की नहीं आई है। यहीं कारण है कि अभी राज्य में वैक्सीनेशन का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। अब तक राज्य में 4.55 करोड़ लोगों ने कोविड की खुराक ली है। इसमें 2.36 करोड़ ने पहली, 1.98 करोड़ ने दूसरी और तीसरी खुराक (बूस्टर डोज) 2.01 लोगों ने ही ली है।
हरियाणा में इस साल कोरोना संक्रमण से अब तक 9 मौतें हो चुकी हैं। सीएम सिटी करनाल के साथ पंचकूला में 2-2 संक्रमितों की मौत के मामले सामने आए हैं। वहीं यमुनानगर, गुरुग्राम, अंबाला, सहित दो अन्य जिलों में 1-1 संक्रमित की मौत हुई है। प्रदेश में अब तक 10724 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है।
प्रदेश में अप्रैल माह में ही संक्रमण दर अचानक से बढ़ी है। पहले तीन हजार तक लोगों के सैंपल लिए जा रहे थे, लेकिन अब इनकी संख्या 9 हजार से पार पहुंच गई है। ज्यादा सैंपलों के साथ ही नए केसों की संख्या बढ़ रही है। साथ ही संक्रमण की दर में भी इजाफा हुआ है। राज्य की संक्रमण दर 1.01 प्रतिशत थी, जो आज आठ के पार हो गई है।
कोविड-19 की दस्तक के बाद लगाए गए हेल्थ वर्कर्स को कॉन्ट्रेक्ट पूरा होने के बाद 31 मार्च से सेवा मुक्त कर दिया गया है। नौकरी से हटने के बाद बेरोजगार हुए हेल्थ वर्कर्स अब सरकार से रोजी-रोटी की मांग कर रहे हैं। कोरोना कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा के राज्य प्रधान संदीप संधु ने बताया कि उनका पंचकूला में धरना जारी रहेगा। हेल्थ वर्कर्स से मीटिंग करके जल्द बड़ा निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर हरियाणा सरकार पूरी तरह से तैयार है। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से इन मामलों पर निगरानी रखे हुए है। राहत की बात ये है कि रिकवरी दर अच्छी है और अधिकतर मरीजों को अस्पतालों की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि सीएम के बताए आंकड़ों में और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में काफी अंतर है।
