पुलिस अधीक्षक श्री हिमांशु गर्ग ने कहा कि हो सकता है आप स्मार्टफोन, कंप्यूटर के मामले में बेहद सतर्क और चाक-चौबंद किस्म के यूज़र हों। आप इंटरनेट से कोई अनजान फाइल डाउनलोड नहीं करते, ईमेल में आने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करते, बहुत जटिल किस्म के पासवर्ड बनाकर रखते हैं, साइबर सुरक्षा के ताजातरीन साधनों का इस्तेमाल करते हैं, किसी दूसरे स्रोत से आने वाली फाइलों को पहले एंटी-वायरस से स्कैन करते हैं। लेकिन कड़वी हकीकत तो यह है कि आप कुछ भी कर लें, फिर भी आपका स्मार्टफोन को हैक किया जा सकता है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि हैक का मतलब सिर्फ उसमें घुसपैठ तक सीमित नहीं है बल्कि ऐसा करने वाले को आपके तमाम टेलीफोन कॉल, कॉन्टैक्ट्स, एसएमएस, फोटो, वीडियो, ईमेल, पासवर्ड और एप्लीकेशनों तक की एक्सेस मिल सकती है। जाहिर है कि आपकी हर सही-गलत, प्राइवेट और पब्लिक गतिविधि उस हैकर की नज़र में होगी। इतना ही नहीं, वह दूर से ही आपके फोन के जरिए किसी को फोन भी कर सकता है।
पुलिस अधीक्षक श्री हिमांशु गर्ग ने कहा कि विदेशी नंबरों व किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा आई किसी भी फोन कॉल या वीडियो कॉल को न उठाएं ऐसा करने से आपका स्मार्टफोन हैक हो सकता है और न ही व्हाट्सएप या ई मेल पर आए किसी भी संदिग्ध लिंक को क्लिक करें ऐसा करने से आप साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं। साइबर अपराधी विदेशी नम्बरो से आपके नम्बर या व्हाटसप अप पर छोटी सी मिस कॉल करते है। उस मिसड कॉल को इग्नोर करे व उसका जबाब ना दे। विदेशी नम्बरो से आए कॉल को ब्लॉक करे व उसकी रिपोर्ट तुरंत डीओटी (डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन) को कर सकते है। जिसके लिए दो नम्बर 1963 या ट्राई न. 1800110420 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करे। यह टोल फ्री नम्बरस है।
आगे उन्होंने कहा कि दुनिया भर के बहुत से प्रभावशाली लोगों के स्मार्टफोन भी हैक हुए है। जिस पिगैसस नाम के स्पाइवेयर की चर्चा है, वह ठीक यही करता है। क्या आप भी व्हाट्सएप के जरिए टेलीफोन कॉल और वीडियो कॉल करते हैं तो सावधान हो जाएं। इसी सुविधा में मौजूद एक तकनीकी खामी का फायदा उठाकर यह स्पाइवेयर आपके स्मार्टफोन को हैक कर लेता है, फिर भले ही आपका फोन एक आइफोन हो या फिर कोई एंड्रॉइड फोन। उन्होंने कहा कि वह किसी भी तरह आपको इस लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करेगा जैसे ही आप लिंक क्लिक करोगे पिगैसस फोन में इन्स्टॉल हो जाता है और उस शख्स को पता चले कि उसमें कुछ इन्स्टॉल किया गया है या फोन को हैक किया गया है। इन्स्टॉल होते ही पिगैसस हैकर से संपर्क करता है और उसके बाद हैकर इसे कमांड देना शुरू कर देता है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि वह आपके कैमरे और माइक्रोफोन को भी ऑन कर सकता है जिससे वह आसपास की गतिविधियों को देख सके। इस हैकर को पकड़ना असंभव है क्योंकि वह न जाने दुनिया के किस गुमनाम स्थान पर बैठकर यह सब कारनामा अंजाम दे रहा होता है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि समय समय पर अपना फोन व व्हाट्सएप अपडेट कर लें। उन्होंने कहा कि सावधानी और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचने का बेहतर उपाय है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का साइबर अपराध घटित हो जाता है तो इसकी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल नम्बर 1930 या वेब पोर्टल https//www.cybercrime.gov.in पर, साइबर थाना या नजदीक पुलिस थाना में स्थित साइबर हेल्प डेस्क में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है।
