सरकारी अस्पताल में 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म के मामले ने तूल पकड़ लिया है। हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने घटना पर गहरा दुख और नाराजगी जताते हुए अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पीएमओ और ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

महिला आयोग अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें 29 मई को मामले की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

जानकारी के अनुसार, पीड़ित बच्ची 27 अप्रैल को पेट दर्द की शिकायत लेकर अपनी दादी के साथ अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि इसके बाद चिकित्सक ने उसे कई बार अस्पताल बुलाया और उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। बच्ची के बयान के आधार पर गंभीर आपत्तिजनक हरकतों के आरोप सामने आए हैं, जिससे वह मानसिक रूप से गहरे सदमे में है।

महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी महिला या नाबालिग मरीज की जांच के दौरान महिला स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए। यदि जांच के समय महिला नर्स मौजूद नहीं थी तो यह अस्पताल प्रशासन की गंभीर चूक है। उन्होंने कहा कि इस पहलू की गहन जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर अस्पताल की पीएमओ और संबंधित नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करने की बात भी कही। उनके अनुसार प्रथम दृष्टया यह मामला केवल आपराधिक कृत्य ही नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी प्रतीत होता है।

महिला आयोग अध्यक्ष ने पीड़ित बच्ची की मानसिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उसे नियमित काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्ची को कुछ समय तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाए ताकि वह इस मानसिक आघात से बाहर निकल सके।

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपी को किसी प्रकार की विशेष सुविधा या वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिलना चाहिए। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग से अस्पतालों में महिला मरीजों की जांच से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने की मांग की।

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