फरीदाबाद। फरीदाबाद के सेक्टर-3 स्थित सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। देर रात प्रसव पीड़ा होने पर एक गर्भवती महिला को अस्पताल लाया गया, लेकिन आरोप है कि अस्पताल का गेट समय पर नहीं खोला गया। इसके चलते महिला की डिलीवरी अस्पताल परिसर की पार्किंग में ही करानी पड़ी।
परिजनों का कहना है कि ड्यूटी पर मौजूद अस्पताल स्टाफ ने समय रहते महिला को अंदर भर्ती नहीं किया। समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण मजबूरन खुले परिसर में प्रसव कराना पड़ा। घटना के बाद परिवार के लोगों में भारी नाराजगी देखी गई और उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया।
मामले की सूचना स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी गई है। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के बाद आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।


महिला के परिवार का आरोप है कि जब वे उसे डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर आए, तो वहां कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था। मेन गेट भी बंद था, और इमरजेंसी वार्ड में भी कोई नर्स नहीं मिली। महिला को लेबर पेन हो रहा था।
इसके बाद, परिवार के साथ आई एक महिला ने पार्किंग में ही उसकी डिलीवरी कराई। महिला ने बेटे को जन्म दिया। परिवार के सदस्य व्हीलचेयर भी खुद ही लेकर आए। मामले में डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रचना का कहना है कि यदि कोई लापरवाही पाई जाती है, तो कार्रवाई की जाएगी।
महिला की पार्किंग में डिलीवरी का एक वीडियो भी सामने आया है। अस्पताल की पार्किंग में स्टॉफ नर्स डिलीवरी प्रोजीसर कराती नजर आ रही है। हालांकि परिजनों का कहना है कि डिलीवरी कराने के बाद ही स्टॉफ नर्स मौके पर पहुंची।
डिलीवरी के दौरान आसपास कोई रोशनी नहीं थी, स्टॉफ की एक नर्स हाथ में टॉर्च पकड़े दिखाई दे रही है, जबकि दूसरी नर्स टॉर्च की रोशनी में काम कर रही है। इनके पास में ही एक पुरुष भी खड़ा नजर आ रहा है। परिवार का कहना है कि ये पुरुष स्टॉफ से जुड़ा था।
घटना से जुड़ा एक अन्य वीडियो भी सामने आया है, इसमें परिवार का एक व्यक्ति स्टॉफ पर चिल्लाता नजर आ रहा है। उसने कहा कि अगर महिला की मौत हो जाती तो ये किसकी जिम्मेदारी होती। इसके बाद हंगामा कर रहे परिजनों को एक नर्स कुछ समझाती भी नजर आ रही है।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रचना ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। महिला गंभीर स्थिति में अस्पताल आई थी। अस्पताल के स्टाफ को तैयार होने में 5-7 मिनट लग गए, क्योंकि वे अपना चश्मा और उपकरण ले रहे थे। इसी बीच, महिला की डिलीवरी पार्किंग में हो गई। स्टाफ ने पार्किंग में ही सारी प्रक्रिया पूरी की और महिला तथा शिशु को वार्ड में भर्ती कराया। अगर मामले में किसी की कोई लापरवाही सामने आती है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
