दमोह, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल की सफाई व्यवस्था और मरीजों के परिजनों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वायरल वीडियो में एक महिला अस्पताल के वार्ड में फर्श पर पोंछा लगाती और गंदगी साफ करती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि महिला अपने बीमार बेटे का इलाज कराने अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि बेटे के कारण फर्श पर गंदगी फैलने के बाद ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने सफाईकर्मी को बुलाने के बजाय महिला से ही सफाई करने के लिए कहा।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि जिला अस्पताल में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत 55 सफाईकर्मी और सुपरवाइजर तैनात बताए गए हैं। सफाई व्यवस्था के लिए संबंधित एजेंसी को हर महीने करीब 8 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने संबंधित नर्सिंग ऑफिसर, सफाई एजेंसी और सहायक अस्पताल प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। वहीं, अस्पताल अधीक्षक ने वीडियो को करीब डेढ़ महीने पुराना बताते हुए घटना के संबंध में अलग पक्ष रखा है।
बीमार बेटे का इलाज कराने अस्पताल पहुंची थीं 58 वर्षीय महिला
जानकारी के अनुसार, दमोह जिले के तेजगढ़ क्षेत्र के सिमरिया गांव की रहने वाली 58 वर्षीय हल्की बहू अपने बीमार बेटे का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंची थीं। बताया गया है कि उनके बेटे को डायरिया यानी दस्त की शिकायत थी। महिला रात के समय बेटे को लेकर अस्पताल आई थीं।
इलाज के दौरान अस्पताल के पुरुष वार्ड में फर्श पर गंदगी फैल गई। महिला का आरोप है कि वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें ही गंदगी साफ करने के लिए कहा। इसके बाद महिला फर्श पर पोंछा लगाने लगीं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में महिला को अस्पताल के फर्श की सफाई करते देखा जा सकता है।
इस घटना को लेकर अस्पताल में मरीजों के साथ आए परिजनों की जिम्मेदारी, सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता और अस्पताल कर्मियों के व्यवहार पर सवाल उठ रहे हैं।
11 अक्टूबर की रात सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
दमोह जिला अस्पताल से जुड़ा यह वीडियो रविवार, 11 अक्टूबर 2026 की रात सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
प्रारंभिक मीडिया रिपोर्टों में घटना शनिवार, 10 अक्टूबर की रात की बताई गई। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने जांच के दौरान वीडियो करीब डेढ़ महीने पुराना होने की बात कही है। इस कारण घटना की वास्तविक तारीख को लेकर दोनों तरह की जानकारी सामने आई है।
वीडियो में महिला को फर्श पर पोंछा लगाते हुए दिखाया गया है। महिला का कहना है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने उनसे सफाई करने के लिए कहा था। दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मामले में स्टाफ से पूछताछ के दौरान अलग जानकारी मिली है। इसलिए घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर उठाए सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मामले को उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं और सफाई कर्मचारियों की तैनाती पर सवाल खड़े किए।
जीतू पटवारी ने महिला की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ नहीं है, क्या कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा या फिर सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी हो रही है।
कांग्रेस की ओर से इस घटना को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों में सफाई की निगरानी से जोड़कर उठाया गया। वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही और मरीजों के परिजनों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई।
हालांकि, सफाई व्यवस्था में भ्रष्टाचार या धन के दुरुपयोग को लेकर लगाए गए सवाल राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इन आरोपों की पुष्टि के संबंध में कोई अंतिम जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अस्पताल अधीक्षक ने बताया करीब डेढ़ महीने पुराना वीडियो
वायरल वीडियो को लेकर जिला अस्पताल प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र सिंह के अनुसार, मामले की जांच की गई और वीडियो करीब डेढ़ महीने पुराना पाया गया।
अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि स्टाफ से पूछताछ में जानकारी मिली कि सफाईकर्मी पहले ही सफाई कर चुका था। इसके बाद मरीज के परिजन ने अपनी तरफ से बाकी जगह भी साफ कर देने की बात कही थी।
अस्पताल प्रशासन के इस पक्ष और महिला के आरोप में अंतर है। महिला का कहना है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने उनसे फर्श साफ करने के लिए कहा था, जबकि प्रशासन की ओर से बताया गया कि सफाईकर्मी पहले ही सफाई कर चुका था और परिजन ने आगे सफाई करने की बात कही थी।
अस्पताल अधीक्षक ने वीडियो के जरिए अस्पताल की छवि धूमिल करने की कोशिश होने की बात भी कही। हालांकि, वायरल वीडियो और सामने आए अलग-अलग बयानों के बीच घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए विभागीय जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
55 सफाईकर्मी तैनात, हर महीने करीब 8 लाख रुपये का भुगतान
इस मामले में अस्पताल की सफाई व्यवस्था से जुड़े आंकड़े भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जिला अस्पताल में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कुल 55 कर्मचारी तैनात बताए गए हैं। इनमें 52 सफाईकर्मी और तीन सुपरवाइजर शामिल हैं।
सफाई व्यवस्था के संचालन के लिए संबंधित एजेंसी को हर महीने करीब 8 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अस्पताल में सफाई के लिए इतनी संख्या में कर्मचारी तैनात हैं और एजेंसी को नियमित भुगतान किया जा रहा है, तो मरीज के परिजन को फर्श साफ करने की नौबत क्यों आई?
हालांकि, केवल वायरल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सफाई व्यवस्था में वित्तीय अनियमितता हुई है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन और संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय की जा सकेगी।
नर्सिंग ऑफिसर, सफाई एजेंसी और सहायक अस्पताल प्रबंधक को नोटिस
मामले के सामने आने के बाद जिला अस्पताल प्रबंधन ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल के अनुसार, संबंधित ड्यूटी नर्सिंग ऑफिसर, सफाई एजेंसी और सहायक अस्पताल प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
नोटिस के जरिए संबंधित पक्षों से मामले के संबंध में जवाब मांगा गया है। सिविल सर्जन ने कहा है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल नोटिस जारी होना विभागीय कार्रवाई की शुरुआत है। उपलब्ध रिपोर्टों में संबंधित लोगों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई या जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इलाज के बाद बेटे की हालत में सुधार, अस्पताल से मिली छुट्टी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महिला के बेटे की हालत में इलाज के बाद सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालांकि, इस मामले में चर्चा का मुख्य विषय अस्पताल के वार्ड में सफाई की जिम्मेदारी और मरीज के परिजनों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर है।
मरीज के परिजन अस्पताल में अपने बीमार परिवार के सदस्य की देखभाल और इलाज में सहायता के लिए आते हैं। ऐसे में अस्पताल की सफाई व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच यह जरूरी हो जाता है कि घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी स्पष्ट की जाए।
अब जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
दमोह जिला अस्पताल का यह वीडियो सामने आने के बाद सफाई व्यवस्था, आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती, एजेंसी को होने वाले भुगतान और अस्पताल कर्मियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठे हैं।
एक तरफ महिला ने आरोप लगाया है कि उनसे फर्श साफ करने के लिए कहा गया, वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सफाईकर्मी पहले सफाई कर चुका था और परिजन ने आगे सफाई करने की बात कही थी। प्रशासन ने संबंधित नर्सिंग ऑफिसर, सफाई एजेंसी और सहायक अस्पताल प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
अब विभागीय जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई, महिला से सफाई कराने की जिम्मेदारी किसकी थी और अस्पताल की सफाई व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं
