कई बार ऐसा होता है कि महिला सीट होने के कारण पुरुष उस पद पर काबिज नहीं हो पाते और उस पद अपनी पत्नी, माँ या किसी अन्य महिला को चुनाव में खड़ा कर देते है , और जनता के सामने ये भी वादे हो जाते है कि काम तो साहब ने ही करने बस चेहरा इनका होगा। और वो महिला चुनाव जीत जाती है वो बिना चुनाव लड़े वो पुरुष भी उस पद को।जीत जाता है और सभी सरकारी गैर सरकारी कामों में अपना दखल शुरू कर देते है लेकिन अब हरियाणा सरकार इस मामले में सख्त हो गई है । प्रदेश में महिला सरपंचों को लेकर हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने अहम आदेश जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब महिला सरपंचों की जगह उनके पति या कोई अन्य अनधिकृत व्यक्ति सरकारी कार्यवाही में भाग नहीं ले सकेगा।
उप राज्य सूचना आयुक्त (Dy. State Information Commissioner) के समक्ष आने वाले मामलों में महिला सरपंचों को स्वयं उपस्थित होना होगा। उनके स्थान पर पति, रिश्तेदार या कोई अन्य व्यक्ति मामले की पैरवी नहीं कर सकेगा।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यदि भविष्य में किसी महिला सरपंच की ओर से कोई पुरुष प्रतिनिधि या अनधिकृत व्यक्ति पेश होता है, तो ऐसी कार्यवाही को मान्यता नहीं दी जाएगी। आयोग ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की भावना के विपरीत बताया है।
आयोग का मानना है कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देकर नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई है, इसलिए निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों का निर्वहन स्वयं करना चाहिए। उनके स्थान पर पति या अन्य लोगों द्वारा फैसले लेना और सरकारी प्रक्रियाओं में भाग लेना महिला नेतृत्व की मूल भावना को कमजोर करता है।
इस आदेश को पंचायत स्तर पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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