सोनीपत के गांव सिसाना के सचिन को 26 जून को वापस ड्यूटी पर जाना था। लेकिन ईश्वर को कुछ और मंजूर था। बुधवार दोपहर उसका शव घर पहुंचा तो हर आंख नम थी। सैनिक सचिन के अंतिम संस्कार के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। इस बीच हर आंख नम थी। वहीं सचिन मंगलवार को पिता से प्लॉट देखने की बात कहकर आया था।

सुबह ड्यूटी पर भी जाना है। फिर कब आऊंगा पता नहीं। इसलिए पिता ने भी उसको नहीं रोका। शायद परिजन उसको रोहतक आने से रोकते तो उसकी जान बच सकती थी। सचिन और सुरेंद्र सड़क किनारे खड़े होकर बात कर रहे थे, तभी तेज गति से कार आई और सचिन की मौत का कारण बन गई। चैंपियनशिप की तैयारी कर रहा था सचिन सचिन बॉक्सिंग का खिलाड़ी थी। उसकी आठ साल पहले पहले स्पोर्ट्स कोटे (बॉक्सिंग) से आर्मी में कांस्टेबल के पद पर नौकरी लगी थी। वहीं सचिन का एक छोटा भाई भी है। सचिन की पत्नी ने डेढ़ साल पहले एक बेटी को भी जन्म दिया था। वहीं सचिन के परिजनों की माने तो सचिन आर्मी की तरफ से होने वाली चैंपियनशिप की तैयारी भी कर रहा था, इसके लिए वह पुणे में अभ्यास भी कर रहा था। छुट्टी लेकर अपने गांव आया था। उसे 26 जून को वापस जाना था।

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